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दिल की मरम्मत कर सकती हैं कोशिकाएं

ह्यूस्टनअनुसंधानकर्ताओं ने दवा से उपचारिक रक्त स्टेम कोशिकाओं की मदद से चूहों के क्षतिग्रस्त हृदय की मरम्मत करने में सफलता पाई है। समझा जाता है कि इस विधि से मनुष्यों में दिल की बीमारी के कारण होने वाली क्षति को भी दूर किया जा सकता है।

एक अध्ययन के दौरान टैक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने करीब 147000 अणुओं की जांच की और उस अणु का पता लगाया जो मानव रक्त कोशिका को अपरिपक्व हृदय कोशिकाओं से मिलते जुलते रूप में बदल सकता है।

अनुसंधानकर्ताओं ने रक्त स्टेम कोशिकाओं को इस अणु से सक्रिय किया और चूहे के क्षतिग्रस्त दिल में प्रतिरोपित किया। उन्होंने पाया कि चूहे के हृदय के कामकाज में सुधार होने लगा। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और आंतरिक मेडिसिन के सहायक प्रोफेसर डा. जाय श्नीडर ने बताया कि क्लीनिकल परिणाम उत्साहजनक हैं।

यह अध्ययन इसी सप्ताह एक वेबसाइट पर और प्रोसीडिंग्स आफ द नेशनल एकेडमी आफ साइंसेज के नवीनतम अंक में प्रकाशित हुआ है। श्नीडर हृदय रोग विशेषज्ञ भी हैं। उन्होंने कहा कि हृदयाघात रोकने और उसके इलाज की आधुनिक पद्धति खोजे जाने के बावजूद अगर हृदय एक बार क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसकी मरम्मत वह अपने आप नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि हृदयाघात मानव द्वारा उत्पन्न की गई समस्या है।

अध्ययन के पहले चरण में चूहे की स्टेम कोशिकाओं का उपयोग किया गया। इसके लिए अनुसंधानकर्ताओं ने 147000 अणुओं का अध्ययन कर पता लगाया कि कौन सा अणु हृदय के विकास के शुरूआती दौर में जीनों को सक्रिय कर देता है। बाद में अनुसंधानकर्ताओं ने एसएचजेड तत्व पर अपना ध्यान केंद्रित किया। परीक्षणों से पता चला कि एसएचजेड उपचारित कोशिकाएं आरएनए तथा प्रोटीन बनाना शुरू कर देती हैं, लेकिन ये कोशिकाएं केवल हृदय कोशिकाओं में पाई जाती हैं।

इन कोशिकाओं को उन चूहों में प्रतिरोपित किया गया जिनके दिल में गड़बड़ी थी। एक सप्ताह बाद चूहों के हृदय की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार पाया गया। तीन सप्ताह बाद हृदय में संकुचन उतनी ही मजबूती से होने लगा जितना क्षतिग्रस्त होने से पहले होता था।





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