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छज्जा गिरने से दो की मौत

नवलगढ़. अगुणा मोहल्ले में रविवार को छज्जा गिरने से दो युवकों की मौत हो गई जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए सीकर रैफर किया गया। जानकारी के अनुसार सुबह 10 बजे वार्ड 14 के अब्दुल शकूर के मकान का छज्जा अचानक गिर गया। हादसे के वक्त छज्जे के नीचे बैठे इरफान (22) पुत्र महबूब खोकर, वसीम (19) पुत्र मजीद जिंदरान, जुनेद (08) पुत्र जुबेर तंवर तथा मनान (09) पुत्र शकुर लंगा हादसे के शिकार हो गए।

छज्जा गिरने ये हुए धमाके की आवाज सुनकर मोहल्ले के लोग मौके पर पहुंचे और मलबे के नीचे दबे युवकों को निकालकर सरकारी अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल ले जाते वक्त इरफान व वसीम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। जबकि जुनेद व मनान की हालत नाजुक होने के कारण दोनों को सीकर रैफर कर दिया।

डाक्टरों के मुताबिक, दोनों युवकों के पैरों में फ्रैक्चर आया है। घटना की जानकारी पर तहसीलदार गिरवरसिंह देवल, सीआई बृजमोहन असवाल, युवा विकास मंच के सचिव राजपाल शर्मा, राजस्थान जनसत्ता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष मो. फारुक बड़गुर्जर व कमरुदीन कुरेशी मौके पर पहुंचे। वार्ड के लोगों ने हादसे के शिकार परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।

ऑक्सीजन की सुविधा नहीं मिली। सुविधाओं के बारे में कई बार उच्च अधिकारियों को लिखा जा चुका है। ऊपर से कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है।
- डा. गणोश गुप्ता, अस्पताल प्रभारी

और वो दो मिनट

घटना के ठीक दो मिनट पहले छज्जे के नीचे करीब सात लोग बैठे हुए थे। छज्जे वाले मकान में अयातुर रहमान की शादी की तैयारियां चल रही थीं। इस कारण यहां लोगों का जमघट लगा हुआ था। लोगों ने बताया कि अयातुर घर का सामान रखवाने के लिए छज्जे के नीचे बैठे युवकों में से दो युवकों को अपने घर ले गया। वे दोनों युवक छज्जे के नीचे से हटे और अचानक छज्जा धड़ाम से गिर गया।

अफरा-तफरी का माहौल

छज्जा गिरने के बाद मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई। हादसे की खबर जिसने भी सुनी, वह स्तब्ध रह गया। हर कोई मलबे के नीचे दबे युवकों को निकालने के लिए दौड़ पड़ा। घटनास्थल पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। लोगों ने बताया कि मकान करीब 20 साल पुराना है। वैसे तो छज्जा ठीक हालत में था लेकिन पट्टी बीच में से कैसे टूटी लोगों को भी समझ नहीं आ रहा है।

घुटता रहा दम, नहीं मिला ‘जीवन’

19 वर्षीय वसीम का दम घुटता रहा, वह तड़पता रहा, कहराता रहा, बार-बार ऑक्सीजन मांगता रहा। मजबूर परिजन वसीम को जीवन देने के लिए कुछ भी नहीं कर पाए। प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों में चक्कर काटने के बाद भी ऑक्सीजन का इंतजाम नहीं होने से वसीम ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। लोगों की मानें तो वसीम को समय रहते ऑक्सिजन मिल जाती तो शायद वसीम आज जिंदा होता।

ये हैं सरकारी अस्पताल के हालात

>> दस साल पहले खराब होने के बाद आज तक एंबूलेंस की व्यवस्था नहीं हुई।
>> नेत्र विशेषज्ञ, सर्जन व महिला चिकित्सक के पद खाली हैं।
>> आपरेशन थियेटर में सुविधाएं ना के बराबर।
>> ब्लड बैंक भी नहीं हैं।
>> मरीजों को भर्ती करने के लिए बैड की कमी।
>> डिलीवरी की भी व्यवस्था भी नहीं।
>> जनरेटर की सुविधाएं भी मुहैया नहीं।
>> अस्पताल में फीमेल वार्ड भी नहीं है।

करोड़ों का बजट फाइलों में दफन

>> 1.68 लाख रुपए से बनी ओटी के लिए डाक्टरों के कई पद स्वीकृत नहीं।
>> जर्जर हो चुके हैं दस लाख के फर्नीचर।
>> कंडम उपकरणों की नीलामी के प्रयास केवल कागजों में।
>> सरकारी अस्पताल के नए भवन का एक करोड़ का प्रोजेक्ट तीन साल से कागजों में दबा है।





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