भोपाल. सांप्रदायिक दंगों की जांच करने वाले विभिन्न आयोगों की रिपोर्ट में आरोपों के घेरे में आए नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स में से जिन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, ऐसे नामों की स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट (सिमी) सूची तैयार कर रहा था। सिमी नेताओं और अफसरों के खिलाफ जनवरी 09 से कार्रवाई शुरू करने वाला था, जिसके लिए संगठन ने कैंप भी लगाए थे।
सूत्रों के मुताबिक सिमी के सदस्यों से अब तक हुई पूछताछ में सामने आया है कि ये लोग 1992, मेरठ और गुजरात के दंगों सहित महाराष्ट्र के दंगों की जांच करने वाले श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्टो का अध्ययन कर रहे थे। इन रिपोर्टो में शामिल आरोपियों के नाम और उनमें से किन-किन पर कार्रवाई हो चुकी है या चल रही है, उसकी छंटनी कर रहे थे। जिन आरोपियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, संगठन उनके नामों की सूची तैयार कर रहा था।
चार कैंप हो चुके थे:
सूत्र बताते हैं कि सिमी की योजना के मुताबिक दंगा जांच आयोगों में शामिल आरोपियों की सूची में से एक-एक के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्राथमिकता तय की जाना थी।
संगठन ने इसके लिए वर्ष 2007 में इंदौर के पास चोरल, कर्नाटक में हुबली, केरल में बागमन और वर्ष 2006 में उज्जैन में कैंप भी लगाए थे। इंदौर के खजराना क्षेत्र स्थित श्यामनगर में एकबार फिर ये लोग अपनी तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे।
जनवरी 09 से शुरू होती कार्रवाई
सूत्रों का कहना है कि सिमी की तैयारी थी कि जनवरी 09 से सूची में शामिल नेताओं और अफसरों खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। पुलिस अफसर कहते हैं कि सिमी के सदस्यों ने सूची में शामिल नेताओं और अफसरों के नाम का खुलासा अब तक नहीं किया है। उनके पास से मिली सीडी और पेन ड्राइव में भी नामों की सूची नहीं मिली है। सिमी के सदस्यों ने पूछताछ में यह अवश्य माना कि सूची जल्द ही तैयार होने वाली थी।