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11 लाख के पौधे नष्ट

दुर्ग. जिले के किसानों को मुफ्त बांटने के लिए महीनेभर पहले खरीदे गए 11 लाख रुपए के एलोवेरा (घी क्वांर) के पौधे सरकारी रोपणी में पड़े-पड़े खराब हो गए। यही हालत रही तो पखवाड़ेभर के अंदर और 25 फीसदी पौधों के नष्ट होने का अंदेशा है। औषधीय गुणों के कारण इन पौधों का काफी महत्व है। अहेरी स्थित शासकीय उद्यान रोपणी में जगह-जगह पौधों का ढेर लगा है, जिसमें से ज्यादातर गल गए हैं। जिले में एलोवेरा की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यान विभाग ने योजना तैयार की है।

किसानों को आम के पौधों के साथ इंटरक्राप फसल के रूप में एलोवेरा के पौधे मुफ्त दिए जाने हैं। हैदराबाद से विभाग ने दो रुपए प्रति पौधे की दर से करीब 22 लाख पौधे खरीदे। महीनेभर पहले इन पौधों के 500 बैग अहेरी रोपणी में पहुंचा दिए गए। विभाग का कहना है कि एनजीओ को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह किसानों को पौधों का वितरण करे, लेकिन एनजीओ ने ऐसा नहीं किया।

रोपणी में आज भी पौधों से भरे जूट के बैग बिखरे पड़े हैं, जिनको ठीक से पानी भी नहीं दिया जा रहा। ज्यादातर बारदाने और पौधे गल गए हैं। इनसे दरुगध आने लगी है। ऐसे बोरों और पौधों को अलग कर धूप में रखा जा रहा है।

हैरानी की बात यह है जिस रोपणी में 44 लाख रुपए के पौधों को रखा गया है, वहां पर्याप्त पानी तक नहीं है। यहां काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि पानी के लिए रोपणी में बोरिंग करवाया जा रहा है। बड़ी तादाद में पौधों को क्यारियों में डाल दिया गया है, लेकिन सिंचाई के अभाव में वे सूखने लगे हैं। हालांकि विभाग के कर्मचारियों का दावा है कि पौधों को सूखने के पहले बचा लिया जाएगा। उनका कहना है कि एलोवेरा के पौधे आसानी से सूखते नहीं। थोड़े से प्रयास से उनको बचाया जा सकता है।

औषधीय गुण नष्ट होने का खतरा

साइंस कालेज में बाटनी के प्रोफेसर चेलिक स्वामी ने बताया कि एलोवेरा या घी क्वांर की पत्तियों से लेकर जड़ तक औषधि के रूप में उपयोग की जाती है। महिलाओं की अनेक बीमारियों में यह रामबाण का काम करता है। इससे बनी औषधि सरदर्द और पेटदर्द में भी काफी उपयोगी होती है। यह आदर्श कृमिनाशक है। पूरा पौधा गूदेदार होता है। इसके कारण यह बेहद संवेदनशील भी होता है। इसको पानी की आवश्यकता कम पड़ती है, लेकिन सिंचाई के प्रति लापरवाही बरतने से इसके औषधीय गुण नष्ट होने की आशंका बढ़ जाती है। प्रो. स्वामी का कहना है कि जिस हालत में पौधों को रोपणी में रखा गया है, उसमें पौधों का बचना मुश्किल है।

किसानों को वितरित करने 11 ट्रक पौधे आए हैं। 15-20 प्रतिशत पौधे ट्रांसपोर्टिग के कारण खराब हुए हैं। शेष पौधों को संरक्षित रखा गया है। जिन्हें स्वस्थ कर किसानों को दिया जाएगा। जो पौधे सूखे हुए दिखाई दे रहे हैं, उन्हें भी बचा लिया जाएगा।

- केके पांडेय, डिप्टी डायरेक्टर, उद्यान विभाग





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