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उदासीनता का दंश झेल रहा एक गांव

जांजगीर. अकलतरा विकासखंड से लगे ग्राम खिसोरा में विकास कार्य ठप हैं। कोई भी कार्य नहीं होने से यहां अनेकों समस्याओं ने पैर पसारना शुरू कर दिया है।

लगभग साढ़े ३ हजार की जनसंख्या वाले इस गांव में पिछड़ी अनुसूचित जाति की बहुलता है। जो सामाजिक स्तर में पिछड़ने के साथ ग्रामीण स्तर पर ही पिछड़ने का अनुभव कर रहे हैं। शासन द्वारा ग्राम पंचायत में विकास कार्यो को करा कर ग्राम सुराज का सपना साकार करने का लक्ष्य खिसोरा गांव में आकर दम तोड़ देता है। ऐसा नहीं है कि यहां सरपंच निष्क्रिय या उदासीन है। मुखिया होने के नाते युवा सरपंच अजय र्कुे भी ग्रामीणों की समस्याएं दूर करने व गांव में विकास कार्य कराने का इच्छुक है।

पर सचिव की निष्क्रियता व शासन की उपेक्षा के चलते वह भी मजबूर है। किसी भी प्रकार का कार्य नहीं होने से गांव में पानी, बिजली, सड़क जैसी समस्याएं विकराल रूप लेती जा रही हैं। वहीं रोजगार गारंटी, पेंशन योजना, आवास योजना, मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। गांव की पंच गणोशिया बाई, प्रवीणधन र्कुे व ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ग्राम पंचायत जैसी कोई शासन व्यवस्था नहीं हो पा रही है। विकास या निर्माण कार्य नहीं होने से ग्रामीण गर्मी में पानी, बिजली जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

पानी का कुंड तरस रहा पानी को

अकलतरा क्षेत्र के आसपास ग्राम खिसोरा पानी के कुंड वाले गांव के नाम से जाना जाता है। यहां ३क्-४क् फीट पर ही पानी मिल जाता है। दुभाग्यपूर्ण बात यह है कि गांव के लोग गर्मी में पीने के पानी के लिए भी तरस जाते हैं। वैसे तो गांव में १क् हैडपंप हैं, इसमें 3 हैडपंपों पर बेजा कब्जा कर लिया गया है। र्दीपारा स्थित एक हैडपंप में पाइप व नल नहीं फिट किया गया है। बाकी के हैडपंपों में एक तो पानी कम आता है, दूसरा हैडपंप घरों से बहुत दूर है, जिससे लोगों को परेशान होती है।

पानी टंकी है पर पाइप नहीं

नल जल योजना के तहत पीएचई विभाग द्वारा गांव में ७५ हजार लीटर क्षमता वाली पानी टंकी २१ लाख ६७ हजार की लागत से तैयार तो कर दी गई। पर निर्माण कार्य शुरू होने व टंकी का कार्य पूर्ण होने के ९ माह बाद भी गांव में पाइप लाइन नहीं बिछ पाई, न ही मोटर चलाने हेतु बिजली का कनेक्शन हो पाया है। सरपंच अजय र्कुे ने बताया कि पीएचई विभाग द्वारा साढ़े 7 एचपी के 2 मोटरपंप लगाने हेतु राशि विद्युत विभाग को दी जा चुकी है, पर अभी तक बिजली का कनेक्शन नहीं लग पाया।

तालाबों में पानी नहीं

पीने के पानी के अलावा ग्रामीणों को नहाने-धोने के पानी की समस्या भी है। गांव में 3 तालाब हैं। पर तीनों में बहुत कम मात्रा में पानी बचा है जो गंदा व प्रदूषित हो चुका है। बचा पानी भी अप्रैल के अंत तक या मई के शुरूआती दिनों में ही सूख जाएगा। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।

वोल्टेज की कमी से परेशानी

पानी की समस्या के साथ बेहाल गर्मी में लोग बिजली से भी परेशान हैं। साढ़े 3 हजार की जनसंख्या वाले लगभग ६क्क्-६५क् घरों के लिए ६३ केवीए का एक ट्रांसफार्मर लगाया गया है। जो इतना कम वोल्टेज का है कि रात में १क्क् वाट का बल्ब भी लैंप जितनी रोशनी नहीं दे पाता। बिजली की मांग पर विद्युत विभाग ने एक और ट्रांसफार्मर गांव में लगाया है। विगत 8 माह से यह केवल शोपीस बन कर रह गया है, क्योंकि खंभे इतने क्षतिग्रस्त हो चुके हैं कि कभी भी यह ट्रांसफार्मर गिर सकता है। सरपंच का कहना है कि इस संबंध में अधिकारियों को कई बार आवेदन दिया गया है, पर कोई लाभ नहीं हुआ।

ग्रामीणों व सचिव के बीच विवाद

खिसोरा में विकास कार्यो के ठप पड़ने का मुख्य कारण गांव के लोगों व सचिव के बीच विवाद है। सरपंच ने बताया कि २क् अगस्त क्७ को ग्रामसभा में सचिव को पद से पृथक कराने का प्रस्ताव पारित किया गया था। अनुविभागीय अधिकारी से १क् सितंबर क्७ को स्थगन आदेश मिलने के बाद सचिव ग्राम के विकास कार्यो के प्रति उदासीन है।

इसीलिए यहां के निराश्रितों को पेंशन 2 माह के बाद मिलती है। सरपंच अजय र्कुे को कहाग्राम पंचायत ने जनपद पंचायत अकलतरा व जिला पंचायत जांजगीर में आवेदन देकर दूसरे सचिव की कई बार मांग की है, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ८ महीने हो गए, न तो शासन सचिव के बारे में कोई निर्णय ले पाया है, न ही दूसरा सचिव दे रहा है। इस विवाद का हल नहीं होने से गांव में विकास व निर्माण कार्य ठप हैं।





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