News
Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. काउंटर मेग्नेट सिटी के लिए विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ने 1500 हेक्टेयर की नई आवासीय योजना तैयार की है। साडा ने चार अप्रैल के राजपत्र में इसका प्रकाशन कराकर एक माह में दावे-आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
काउंटर मेग्नेट सिटी के लिए राज्य सरकार ने साडा को तीन हजार हेक्टेयर जमीन दी है। जमीन की मांग बढ़ने के साथ ही अब साडा भविष्य के लिए प्रस्तावित आवासीय सेक्टरों के लिए अभी से बड़े भू-खंड आरक्षित कर रहा है। लगभग 1500 हेक्टेयर जमीन में साडा ने पांच बड़ी आवासीय योजनाओं के लिए जगह आरक्षित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 50 के अंतर्गत साडा ने निरावली, जिनावली, जिगसौली, गजूपुरा, वीलपुरा, की 349.713 हेक्टेयर निजी जमीन का आवासीय योजना के लिए चयन किया है। दूसरी आवासीय योजना के लिए साडा ने 502.708 हेक्टेयर जमीन ग्राम सिगौरा, जिगसौली, कुलैथ व खेरिया- कुलैथ में आरक्षित की है। तीसरी आवासीय योजना के लिए 120.152 हेक्टेयर निजी जमीन ग्राम सिगौरा, खेरिया कुलैथ में, चौथी आवासीय योजना के लिए साडा ने 331.80 हेक्टेयर जमीन जिगसौली, कुलैथ व खेरिया खुलैथ में तथा पांचवीं आवासीय योजना के लिए साडा ने ग्राम सोजना, विठौली, ओडपुरा, महाराजपुरा, व रामपुरा में 286.328 हेक्टेयर निजी जमीन आरक्षित की है।
साडा ने आवासीय योजना में शामिल की उक्त ग्राम की भूमि के सर्वे नम्बर व विकास योजना का प्रारूप साडा कार्यालय के अलावा टाउन एन्ड कंट्री प्लानिंग कार्यालय में दावे-आपत्तियों के लिए रखवाए हैं। इसके अलावा उक्त गांवों की निर्धारित सर्वे नंबरों की जमीन को आवासीय योजना में शामिल करने की जानकारी का प्रकाशन प्रदेश के राजपत्र में भी करवाया है।
साडा सीईओ कुमार पुरुषोत्तम का कहना है कि विकास योजना लागू होने के बाद तीन साल में उस योजना पर अमल करना होता है। नई आवासीय योजना से साडा तीन साल में 1500 हेक्टेयर जमीन का भू-अर्जन करेगा। यदि साडा भू-अर्जन नहीं भी करेगा तो तीन साल तक साडा की विकास योजना में शामिल की गई जमीन को खरीद कर कोई बिल्डर निर्माण नहीं कर पाएगा। इससे साडा को भविष्य में आवासीय योजनाओं के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध रहेगी। जिस जमीन को साडा ने आवासीय योजना में शामिल किया है, उसके किसानों को भी इससे फायदा होगा। जो किसान भू-अर्जन की राशि नहीं लेंगे वे कुल जमीन के बदले 20 फीसदी जमीन विकसित प्लाट के तौर पर ले सकेंगे।
क्या है टीएन्डसीपी की आपत्ति
टीएन्डसीपी (टाउन एन्ड कंट्री प्लानिंग) ने साडा को पत्र भेजकर नई आवासीय योजना को उनके कार्यालय में नहीं भेजने पर आपत्ति जताई है। टीएन्डसीपी के संयुक्त संचालक वीके शर्मा का कहना है कि विकास योजना का प्रारूप, गांवों के सर्वे नंबर आदि की जानकारी राजपत्र में प्रकाशन से पहले उनके कार्यालय में आनी चाहिए क्योंकि दावे-आपत्तियों के लिए यह आवश्यक है। इसलिए उन्होंने साडा को पत्र लिखकर टीएन्डसीपी के नियम स्पष्ट किए थे। दूसरी तरफ साडा सीईओ का कहना है कि उन्होंने विकास योजना का प्रारूप टीएन्डसीपी को भेज दिया है।