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राजिंद्र सिंह उठाएगा ओलंपिक मशाल

मोहाली.C नाज की बात है कि हमारे पॉवर लिफ्टर राजिंद्र सिंह रहिलू की कद्र हुई और उसे 17 अप्रैल को नई दिल्ली में बीजिंग ओलंपिक की मशाल थामने का न्यौता मिला और लाज की बात यह है कि हमारे पंजाब में ही उसे वाजिब सम्मान नहीं मिल पा रहा है। नौकरी के नाम पर उसे महज कोरे वायदे ही मिले हैं। राजिंद्र ने 2004 में एथेंस के पैरा ओलंपिक्स में ब्रास मैडल जीता था। इससे पहले 2002 में दिल्ली में एशियन बैंचप्रेस चैंपियनशिप में उसने गोल्ड मैडल जीता था। राजिंद्र ने ताइपे के आईडब्ल्यूएएस वल्र्ड गेम्स में सिल्वर और 2007 की एशियन पावर लिफ्टिंग में दो सिल्वर जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

अजरुन पुरस्कार भी : राजिंद्र को 2004 में नेशनल अवार्ड और 2005 में खेल जगत का सबसे बड़ा अजरुन पुरस्कार भी मिला है। जालंधर के महेसमपुर निवासी राजिंद्र का कहना है कि सैमसंग के साउथ वेस्ट एशिया हैडक्वार्टर प्रेसिडेंट और सीईओ एच.बी. ली ने आलंपिक टॉर्च उठाने के लिए उनके नाम की घोषणा की है। ि

पछले दिनों पैरा-ओलंपिक कमेटी के लिए फंड जुटाने के मकसद से भले ही पंजाब में सियासी दलों ने क्रिकेट मैच आयोजित करवाया हो, हकीकत यह है कि आज भी इस खिलाड़ी को सरकारी दिक्कतों के चलते नौकरी नहीं मिल पाई है। उसके गांववालों ने अपने प्रयासों से उसे गांव के स्कूल में स्पोर्ट्स इंस्ट्रक्टर लगाया था। बाद में राजिंद्र ने यह कहकर इस नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था कि वह अपने खेल में बेहतर प्र्दशन के लिए और तैयारी करना चाहता है।





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