भोपाल. मंगलवार की दोपहर बारह बजे। गरमी का आलम यह कि धूप का सामना करना आसान नहीं और किसी वाहन के भीतर बगैर एसी के सुकून की कल्पना करना भी मुश्किल। ऐसे माहौल में पांच से दस साल तक की आयु वाले करीब एक दर्जन बच्चे बगैर एसी की वैन में सफर कर रहे हैं। बाहर से गरम हवा के थपेड़े आ रहे हैं। इनसे बचने के लिए ड्राइवर ने वैन के सभी कांच बंद कर दिए हैं। नतीजतन धूप से बुरी तरह तपती वैन के भीतर घुटन का माहौल भी है।
इस संवाददाता ने मंगलवार की दोपहर राजधानी की सड़कों पर ऐसी कई वैन देखीं, जिनमें सवार मासूम बच्चे झुलसा देने वाली गर्मी में घर से स्कूल जाने-आने का सफर कर रहे थे। शहर के कई स्कूलों में प्रायमरी कक्षाएं दोपहर 12 बजे से लग रही हैं। जिन स्कूलों का समय सुबह से कर दिया गया है, वहां दोपहर में छुट्टी होती है।
एक गृहिणी ने बताया कि उनकी पांच साल की बेटी दोपहर में स्कूल से घर लौटते समय निढाल हो जाती है। गरमी का आलम यह रहता है कि उसकी वाटर बाटल का पानी तक गरम हो जाता है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल का समय इस तरह तय किया जाना चाहिए कि इन दिनों में हर बच्च दोपहर 12 बजे से पहले घर पहुंच जाए।
सभी स्कूलों को एक मई से बंद करने के आदेश दे दिए गए हैं। हमारी कोशिश है कि जब गर्मी अपने शबाब पर होगी और पारा 46 डिग्री तक पहुंचेगा तब तक सारे स्कूल बंद हो जाएंगे।
-आरके माथुर, जिला कलेक्टर, भोपाल