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बेकसूर की उम्र लील गई अफसरों की गलती

जयपुर. hiराजस्थान हाईकोर्ट ने बिना अपराध के 34 साल जेल में सजा काटने वाले प्रभुनाथ के मामले में मंगलवार को गृह सचिव सहित पुलिस व जेल प्रशासन के छह आला अफसरों को जवाब तलब किया है।

जिन अफसरों को तलब किया गया है उनमें महानिदेशक पुलिस, महानिदेशक जेल, अधीक्षक केन्द्रीय कारागार जयपुर, पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर, थानाधिकारी करणपुर एवं जेलर जिला जेल श्रीगंगानगर शामिल हैं।

यह आदेश न्यायाधीश प्रेमशंकर आसोपा ने ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन के सचिव डॉ.विक्रम सिंह नैन एडवोकेट की याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता धर्मवीर ठोलिया ने अदालत को बताया कि दैनिक भास्कर एवं अन्य समाचार पत्रों में 6 अप्रैल 08 को प्रभुनाथ के बारे में खबर छपी थी। इसमें बताया गया था कि उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले के प्रभुनाथ को 1974 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारियों ने भारत-पाक सीमा को पार करने के संदेह में गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार करने के बाद उन्होंने प्रभुनाथ को करणपुर पुलिस को सौंप दिया। करणपुर पुलिस ने उसे देश की सीमा लांघने के अपराध में गिरफ्तार किया। पुलिस को प्रभुनाथ के खिलाफ ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे यह सिद्ध होता हो कि वह सीमा लांघ रहा था। इस पर पुलिस ने उसे निर्दोष मानते हुए मामले पर एफआर लगा दी, लेकिन अदालत को इसकी जानकारी नहीं दी। नतीजा, प्रभुनाथ की रिहाई नहीं हो सकी। इसी दौरान उसकी याददाश्त चली गई और इलाज के लिए 1976 में उसे जयपुर लाया गया और बिना किसी वजह के उसे जीवन के 34 साल जेल में बिताने पड़े।

याचिका में कहा कि प्रभुनाथ देश का नागरिक है, किन्तु उसे बिना किसी दोष के जेल में एक लम्बी अवधि तक रहना पड़ा। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। जेल अधिकारियों ने गैरकानूनी ढंग से प्रभुनाथ को लम्बे समय तक जेल में रखा। यह मानवाधिकारों एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। याचिका में दलील दी गई कि जेल मैन्युअल में हर कैदी का जेल टिकट होता है और उसमें कैदी की सभी जानकारी होती है, किन्तु आश्चर्यजनक है कि जेल टिकट के बिना प्रभुनाथ को इतने वर्र्षो तक जेल में कैसे रखा गया।

याचिका में प्रार्थना की गई कि सरकार प्रभुनाथ के इलाज का पूरा खर्चा वहन करे और उसे विधिक मुआवजा दे। दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाए तथा भविष्य में ऐसी घटना फिर से न हो उसके लिए एक कमेटी गठित की जाए। इस पर अदालत ने मुख्य सचिव एवं अन्य पुलिस अफसरों को दो सप्ताह में जवाब पेश करने के लिए कहा है।





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