इंदौर. खुद को क्राइम ब्रांच की अधिकारी बताकर बच्चे का सौदा करते रंगेहाथ पकड़ी गई जिला जेल की शिक्षिका सविता श्रीवास्तव नौटंकी में माहिर है। करीब ढाई माह पहले जेल में ही आत्महत्या का प्रयास करने पर उसके खिलाफ थाने में केस भी दर्ज है।
7 फरवरी 08 को वह जेल के महिला वार्ड में प्रवेश कर रही थी तब उसके पास मोबाइल होने की शंका होने पर प्रहरी लक्ष्मी राठौर ने उसकी तलाशी ली थी। इससे वह इतनी बिफरी कि दुपट्टा गले में लपेटकर खुदकुशी का प्रयास करने लगी। इससे जेल में हलचल मच गई और सूचना मिलते ही डिप्टी जेलर ललिता गौरे तत्काल वहां पहुंची और बीच बचाव किया।
बाद में बैरक के लोहे पर सिर पटकने लगी तो जेल कर्मियों ने रोका। बाद में जेल कर्मियों ने जेल अधीक्षक हरेंद्रसिंह को सूचना दी कि गले में दुपट्टा डालते वक्त वह चिल्लाकर कह रही थी जेल अधीक्षक और उप जेलर को फंसा देगी। दूसरे दिन जेल अधीक्षक की रिपोर्ट पर थाना संयोगितागंज ने उसके खिलाफ आत्महत्या करने के प्रयास के आरोप में धारा 309 के तहत केस कायम किया।
मामला मुख्यालय तक पहुंचा
जेल अधीक्षक ने इस वाकये से जेल मुख्यालय को भी अवगत कराया। इस पर डीआईजी (जेल) लालजी मिश्रा ने पिछले सप्ताह इंदौर आकर जांच भी की। इस मामले में जेल मुख्यालय के अगले कदम के बारे में पता नहीं चल सका।
पूर्व जेल अधीक्षक की भी शिकायत की थी
श्रीमती श्रीवास्तव ने कुछ माह पहले रिटायर हुए जेल अधीक्षक एसएस चौहान के खिलाफ भी एक टीवी चैनल में इंटरव्यू देकर आरोप लगाया था कि वे उन्हें प्रताड़ित करते हैं। इसकी जांच धार जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने की तो शिकायत झूठी पाई गई। सुश्री सोनकर ने जांच प्रतिवेदन जेल मुख्यालय भेजा तो वहां से डेढ़ माह पहले पूछा गया कि वे सफाई में क्या-क्या कहना चाहती हैं लेकिन उन्होंने अब तक जवाब ही नहीं दिया।
मुख्यालय को अवगत कराया जाएगा
जेल अधीक्षक श्री सिंह का कहना है कि घटना के बारे में अब तक पुलिस की ओर से अधिकृत रूप से कोई जानकारी नहीं मिली। मिलते ही इससे मुख्यालय को अवगत कराया जाएगा और शिक्षिका के खिलाफ आगे कार्रवाई की जाएगी।