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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. जिले की नगर पंचायतों की जमीन को नजूल घोषित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इन जगहों की जमीन रिकार्ड में अब तक छत्तीसगढ़ शासन के नाम पर ही दर्ज है। प्रस्ताव पारित हो जाने के बाद काबिज लोगों को राजस्व विभाग से प्रमाण पत्र मिलेगा, साथ ही शासन को भी लाभ होगा।
शहर का रूप ले चुके रतनपुर, तखतपुर, पेंड्रा, बोदरी, लोरमी, बिल्हा व कोटा नगर पंचायत की जमीन सरकारी रिकार्ड में अब तक शासन के नाम पर ही दर्ज है। आबादी जमीन पर काबिज लोगों को पट्टा दिया गया है। संबंधित जमीन की भू-अधिकार ऋण पुस्तिका उन्हें नहीं मिली है।
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के आठ वर्षो बाद अब प्रशासन ने इन्हें नजूल घोषित करवाने की सुध ली है। हाल ही में सभी नगर पंचायतों में सर्वे कर इन जगहों की जमीन को नजूल घोषित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है, जिसके शीघ्र ही मंजूर हो जाने की उम्मीद है।
इससे वहां के नागरिकों को तो लाभ होगा ही, शासन की राजस्व आय भी बढ़ जाएगी। आवासीय भूमि के नजूल घोषित होने के बाद जमीन के मालिकों को भू-अधिकार पुस्तिका दी जाएगी, इसके एवज में उन्हें शुल्क जमा करना होगा। इसी तरह बेजा-कब्जाधारियों को शुल्क के साथ प्रीमियम की राशि भी देनी होगी। जमीन मालिकों के पास फिलहाल जमीन संबंधी कोई रिकार्ड नहीं है।
जल्द ही उन्हें मालिकाना हक के सारे दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिनसे वे बैंकों से लोन आदि भी ले सकेंगे। अभी राजस्व विभाग से इन स्थानों के भू-खंडों की दस्तावेज निकलवाने पर उनमें किसी व्यक्ति की जगह छत्तीसगढ़ शासन दर्ज होता है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद दस्तावेजों को सुधारने का काम शुरू कर दिया जाएगा।