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Chhattisgarh
Raipur Raipur नई दिल्ली.
सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकार आयोग को छत्तीसगढ़ के नक्सल विरोधी आंदोलन ‘सलवा जुड़ूम’ (शांति अभियान) के कार्यकर्ताओं द्वारा बेगुनाह लोगों को मारने और प्रताड़ित करने के आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी गठित करने और इसकी रिपोर्ट आठ सप्ताह में पेश करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि आंदोलन के कार्यकर्ताओं को नक्सलियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने हथियार बांटे हैं।
सलवा जुड़ूम का बचाव : चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन और जस्टिस आरवी रवींद्रन की बेंच ने यह आदेश नंदानी सुंदर और कुछ अन्य लोगों द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। इस दौरान एडीशनल सोलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने छत्तीसगढ़ में स्थिति को खतरनाक बताते हुए राज्य में सलवा जुड़ूम आंदोलन का बचाव किया।
राज्य सरकार को समर्थन : केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार का पक्ष लेते हुए कोर्ट से कहा कि राजनेताओं व पुलिसकर्मियों समेत आम लोगों की हत्या कर रहे नक्सलियों के प्रभुत्व वाले जंगलों में पुलिस का कोई भी व्यक्ति कदम रखने को तैयार नहीं है।
तेंदूपत्ता उद्योग बरबाद : छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने कोर्ट से याचिका खारिज करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य का तेंदूपत्ता उद्योग नक्सली गतिविधियों की वजह से पूरी तरह बरबाद हो चुका है।
अपराध बढ़े : याचिकाकर्ता के वकील पूर्व एटार्नी जनरल अशोक देसाई ने अपनी दलील में कहा कि राज्य सरकार समर्थित सलवा जुडूम कार्यकर्ता बड़ी तादाद में बेगुनाह लोगों को मारने और उन्हें प्रताड़ित करने में शामिल हैं। राज्य में महिलाओं के साथ यौन प्रताड़ना के मामलों में भी इजाफा हो रहा है।