बीकानेर. बीकानेर के पारंपरिक खाद्य उद्योग भुजिया, पापड़, मिठाई, दुग्ध उत्पाद, पापड़ आदि पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। केन्द्र सरकार की ओर से अगले महीने की 22 तारीख से लागू होने वाले खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के कारण इन उद्योगों को परेशानी होगी।
इस अधिनियम में जो प्रावधान किए गए है उनको देखते हुए फूड पैकेजिंग करना दुश्कर हो जाएगा वहीं व्यापारियों पर हर समय जेल जाने या फिर जुर्माने का भय मंडराता रहेगा। इंस्पेक्टर राज आ जाएगा। इस अधिनियम के बाद फूड पैकेजिंग करने वालों को पैकिंग के समय उत्पाद में शामिल पोषक तत्वों का उल्लेख करना अनिवार्य होगा जो भारत की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए किसी भी हालत में संभव नहीं है।
ग्राहक खाद्य पदार्थ का विश्लेषण करवा सकेगा इससे ब्लैक मैलिंग की संभावना भी बढ़ जाएगी। व्यापारियों का कहना है कि उत्पाद को बनाते समय व्यापारी उसी क्षेत्र से सामग्री की खरीद करता है जहां पर वह उपलब्ध है। ऐसे में सामग्री की क्वालिटी में फर्क आना लाजिमी है। इस स्थिति में फूड पैकेजिंग करते समय पोषक तत्वों की उपलब्धता में भी बदलाव होगा।
भौगोलिक विषमताओं के चलते भारत में प्रत्येक 20 किलोमीटर के बाद स्थितियां बदलती है। कच्चे माल और तैयार माल के भंडारण के दौरान विभिन्न तरह की जलवायु की समस्या आएगी जिसका असर पोषक तत्वों पर पड़ेगा। भारत में छोटे और लघु उद्यमियों के पास आर्थिक व तकनीकी संसाधनों का अभाव है।
इस स्थिति में एकाएक इस अधिनियम की पालना करना मुश्किल ही नहीं असंभव है। व्यापारियों का कहना है कि इस अधिनियम के माध्यम से सरकार इन उद्योगोें को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की गुलाम बनाना चाहती है क्योंकि इतने संसाधन तो केवल इनके पास ही होते हैं।
यह है कानूनी प्रावधान
ठ्ठ खाद्य पर गलत प्रिंट: 3 लाख तक जुर्माना
ठ्ठ अवमानक: 5 लाख तक जुर्माना
ठ्ठ विज्ञापन: 10 लाख तक जुर्माना
ठ्ठ निर्देश की पालना नहीं: 2 लाख जुर्माना
ठ्ठ अस्वच्छ वातावरण: 1 लाख रुपए तक जुर्माना
ठ्ठ मिथ्या सूचना: 2 लाख जुर्माना-3 माह कारावास
ठ्ठ बिना पंजीयन व्यापार: 5 लाख रुपए तक जुर्माना-6 माह कैद
यह अधिनियम छोटे और लद्यु उद्यमियों के लिए कष्टदायी साबित होगा। भारत में 90 प्रतिशत फूड पैकेजिंग करोबार होता है। इस अधिनियम में संशोधन करना बेहद जरूरी है।
-मूलचंद चौपड़ा,सलाहकार, फूड प्रोसेसिंग इकाई