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मां ही मेरी बेस्ट फ्रेंड

चंडीगढ़.घर में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिन्हें दोस्ती में संजोया जा सकता है। जब घर में बहनें हों तो उन्हें किसी और दोस्त की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन जिस घर में अकेली लड़की हो तो वहां मां बनती है बेटी की बेस्ट फ्रेंड। घर पर ही एडवाइस देने वाला कोई मिल जाए तो इससे बेहतर और कुछ नहीं।

कई बातें सिर्फ हमें ही पताअनु और इंदु में एक साल का फर्क है, जिससे एक दूसरे की जरूरतों को वह अच्छी तरह से समझती हैं। दोनों ने आज तक शॉपिंग कभी अकेले नहीं की। एक जैसी चॉइस होने से उन्हें एक साथ शॉपिंग करना बेहद पसंद है। इसलिए घरवालों के कपड़े भी दोनों अकेले खरीद लेती हैं। अनु को इंदु का ज्यादा बोलना पसंद नहीं और इंदु को अनु का कम बोलना। दोनों एक दूसरे को फ्रेंड ज्यादा और बहनें कम मानती हैं। कई बातें हैं जो सिर्फ बहनों को ही मालूम है मां को नहीं। दोनों की दोस्ती पक्की है।

बहन कम फ्रेंड ज्यादा

4 साल का डिफरेंस होने के बावजूद विनीता अपनी बहन श्वेता की जरूरतों को अच्छी तरह जानती हैं। विनीता ने बताया कि वह बड़ी है इसलिए समझती है कि छोटी बहन की जरूरतें क्या होंगी जो उसे पूरी करनी हैं। श्वेता ने बताया कि विनीता उसे कई चीजों के बारे में बताती है, जो शायद मां से समझने में हिचकिचाहट हो। श्वेता ने बताया कि उसे फ्रेंड्स की जरूरत नहीं है, क्योंकि फ्रेंडशिप की सभी जरूरतों को उसकी बहन पूरी कर देती है। अब दोनों को डर है शादी का। विनीता की शादी के बाद श्वेता अकेली पड़ जाएगी।

मां जीती है नई जिंदगी

घर पर बड़े भाई है, लेकिन जगमीत को हमेशा से एक बहन की कमी महसूस हुई। भाई के साथ ज्यादा फ्रेंडली न होने के कारण, जगमीत की फ्रेंड होने का फर्ज उसकी मां सुरिंद्र कौर ने निभाया। शॉपिंग से लेकर घूमने-फिरने तक सभी बातें जगमीत मां से ही शेयर करती है। जगमीत ने बताया कि पहले उसे मां से बातें करने में डर लगा, लेकिन मां की तरफ से मिले प्यार और दोस्ती की वजह से जगमीत जल्दी मां के साथ फ्रेंडली हो गई। सुरिंद्र कौर बताती हैं कि बेटी की फ्रेंड बनने के काफी फायदे हैं। इससे मां को एक नई जिंदगी मिलती है जो अपनी बेटी के रूप में जीती है। इन दोनों को प्यार मिसाल के लायक है।

पार्टी पर जाने के लिए पापा को मनाती हैं मां

हरनीत कौर फ्रेंड्स की तरह अपनी मां से लड़ती भी है। हरनीत ने बताया कि वह लकी है कि उसकी मां बेस्ट फ्रेंड है। हरजीत का मानना है कि आजकल के जमाने में अगर पेरेंट्स बच्चों के फ्रेंड्स बनते हैं तो इससे बच्चों के साथ पेरेंट्स को भी संतुष्टी रहती है कि सब कुछ उनकी निगरानी में हो रहा है। पार्टी पर जाने के लिए हरनीत की मां उसके पापा को मनाती हैं। हरजीत ने बताया कि अपनी यंग एज में जो काम उन्होंने नहीं किए, उनकी बेटी वह करे। इसलिए बर्थ-डे डिस्को पार्टी के लिए हरजीत हरनीत को ड्रेसेस की सलाह देती है। हरनीत मानती हैं कि मां के रूप में उन्हें बेस्ट फ्रेंड मिली है।





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