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Chandigarh Chandigarh मोहाली.इसे जिला स्वास्थ्य विभाग की लाचारी कहा जाए या लापरवाही, मगर पंजाब के अति आधुनिक शहर मोहाली की बड़ी दुकानों में दूध से बने पेय पदार्थ धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा न कभी इन पदार्र्थो के सैंपल भरे गए हैं, न ही यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि ये पदार्थ पीने लायक हैं या नहीं।
बड़ी बात यह है कि जिन हाई-फाई दुकानों में मिल्क बादाम या अन्य रूप में ये पदार्थ बेचे जा रहे हैं, उनके पास फूड एक्ट के तहत कोई लाईसेंस नहीं लिया गया है। मोहाली में स्वास्थ्य विभाग के अनेक आलाधिकारी मौजूद होने के बावजूद ऐसी स्थिति है।
स्वास्थ्य मंत्री के आदेश बड़ी दुकानों के आगे धराशायी: स्वास्थ्य मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने सभी जिलों के सिविल र्स्जस को निर्देश दिए हैं कि गर्मियों में दूध की कमी के चलते कुछ लोग मिलावटी दूध एवं दूध के पदार्थ बनाकर बेचते हैं। इन्हें पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। छोटे दुकानदारों एवं रेहड़ी वालों तक सीमित यह अभियान बड़ी दुकानों तक नहीं पहुंचा।
फूड एक्ट 1950 का उल्लंघन:
पैकिंग कर सामान बेचने के लिए स्वास्थ्य विभाग से प्रोवेंशन ऑफ फूड अडल्ट्रेशन एक्ट 1950 के तहत लाइसेंस लेना होता है। उसके बाद ही कोई व्यक्ति पैकिंग का सामान बेच सकता है, मगर मोहाली में जो मिल्क बादाम बोतलों में पैक कर बेचा जा रहा है, उस पर उक्त एक्ट भी असरदार नहीं।
कोक, पैप्सी, फैंटा की बोतलों में मिल्क बादाम: शहर की अधिकतर दुकानों पर कोक, पैप्सी, फैंटा आदि की बोतलों में मिल्क बादाम एवं केसर मिल्क सील कर बेचा जा रहा है। यह फूड एक्ट के साथ कॉपीराइट एक्ट का भी उल्लंघन है। किसी भी कंपनी के बैनर या ब्रॉड के साथ उसकी मंजूरी के बिना कोई चींज बेचना कॉपीराइट एक्ट के तहत जुर्म है।
नहीं भरे जा रहे सैंपल:
स्वास्थ्य विभाग द्वारा भले ही अडल्ट्रेशन पकड़ने के लिए कई बार अभियान चलाकर दूध, खोया, दही, पनीर तथा मिठाइयों के सैंपल भरे गए हों, मगर दुख की बात यह है कि कभी भी किसी स्वीट शॉप या रेस्टोरेंट पर बिकने वाले मिल्क बादाम, केसर बादाम या ओपन बेची जाने वाली आइसक्रीम के सैंपल नहीं भरे गए।
जो मिल्क पेय पदार्थ बेचे जा रहे हैं, उनकी शुद्धता का पता लगाया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो रहा तो सिविल सर्जन से इसके बारे में रिपोर्ट मांगी जाएगी
- डॉ. एस.पी.एस. सोहल, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज।