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पाक में सिख मैरिज एक्ट को ‘तलाक’

चंडीगढ़.पाकिस्तान में रहने वाले सिखों ने वहां लागू किए गए सिख मैरिज एक्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। सिखों को इस एक्ट के कई प्रावधान मंजूर नहीं हैं और वे इसमें संशोधन चाहते हैं। उन्होंने अभी तक इसके तहत एक भी शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने इस एक्ट को 16 जनवरी को मंजूर किया था। उसके बाद भारत में भी कई अकाली नेताओं ने सिखों के लिए अलग मैरिज एक्ट लागू करने की बात कही थी। अब पाकिस्तान में सिखों का कहना है कि इस एक्ट में विवाह के रजिस्ट्रेशन, तलाक के बाद मुआवजा और बच्चों के अधिकार के बारे में भी कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया।

पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष बिशन सिंह के दो बच्चों की शादी इसी माह हुई है लेकिन उन्होंने इन्हें एक्ट के तहत रजिस्टर्ड नहीं करवाया। बिशन सिंह का कहना है कि एक्ट में बदलाव की जरूरत है। इस साल बैसाखी पर सिख जोड़ों द्वारा शादियों का रजिस्ट्रेशन करवाए जाने की उम्मीद थी पर ऐसा नहीं हुआ। बिशन सिंह ने बताया कि सिखों के एक डेलीगेशन ने प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी से भेंटकर उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत करवाया है। प्रधानमंत्री ने इस बारे में उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।

दुनिया में अकेला देश होने का दावा :

पाकिस्तान ने दावा किया था कि वह पहला देश है जिसमें सिखों के लिए अलग मैरिज एक्ट है। पाक सरकार ने आनंद मैरिज एक्ट 1909 को बदलकर यह एक्ट लागू किया था। पाकिस्तान के पूर्व फैडरल लॉ मंत्री अफजल हैदर ने जनवरी में दावा किया था कि सिख जोड़े बैसाखी फेस्टीवल पर अपनी शादियों का रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे।

नवंबर में होंगे सिख विवाह :

पाक सरकार नवंबर, 2008 में एक उत्सव में सिख जोड़ों को विवाह के लिए आमंत्रित करेगी ताकि वे शादी के बाद एक्ट में रजिस्ट्रेशन करवा सकें। अमेरिकन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से होने वाले इस उत्सव में यूके से 14, अमेरिका से आठ, भारत से नौ और मलेशिया से चार सिख जोड़े शामिल होंगे। आने वाले दिनों में यह गिनती बढ़ सकती है। पाक सरकार ये शादियां नए एक्ट में रजिस्टर्ड करवाकर इस एक्ट का प्रचार करना चाहती है।





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