नई दिल्ली महंगाई और खाद्यान्न संकट के कुप्रबंधन के आरोप झेल रही सरकार को अच्छे मानसून से सहारा मिल सकता है। मौसम विभाग की आरंभिक भविष्यवाणी है कि इस साल मानसून सामान्य जैसा रहेगा। मौसम विज्ञान की शब्दावली में ला नीना के हालात होने से बारिश सामान्य रहेगी।
दक्षिम पश्चिमी मानसून (जून से सितंबर 2008) के बारे मे विज्ञान व तकनीक मंत्री कपिल सिब्बल की राय है कि परिमाण के हिसाब से मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (एलपीए) का 99 फीसदी हो सकती है, इसमें 5 फीसदी की ऊंच नीच रह सकती है। सिब्बल ने कहा कि मानसून लंबी अवधि के औसत से 96-104 फीसदी रहती है तो इसे सरकार सामान्य मानती है। जून में पुनरावलोकन किया जाएगा।
पिछले साल सरकार ने मानसून की बारिश औसत की 95 फीसदी होने की घोषणा की थी। बारिश 105 फीसदी हुई।
कहां है बारिश:
मौसम विभाग की वेबसाइट के अनुसार देश को गेहूं उपलब्ध कराने वाले पंजाब और हरियाणा में इस सप्ताह छितरी हुई बारिश हुई है। एक मार्च से 9 अप्रैल के बीच 27 मौसम सबडिवीजन में अत्यधिक या सामान्य बारिश हुई है। वहीं 36 सबडिवीजनों में से नौ में कमजोर बारिश हुई है। देश में कृषि योग्य जमीन का केवल 40 फीसदी हिस्सा ही सिंचित है, इसलिए कृषि उत्पादन और ग्रामीण आय मानसून पर निर्भर रहेगी।