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शिक्षाकर्मियों की बर्खास्तगी का आदेश निरस्त

कोरबा. हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि जिन शिक्षा कर्मियों को बर्खास्त किया गया है, उनका पक्ष सुना जाये। शिक्षा कर्मी भर्ती में फर्जीवाड़े की जांच के बाद कोरबा जिलाधीश अशोक अग्रवाल ने जनपद पंचायत कोरबा के १९ शिक्षा कर्मियों को बर्खास्त करने का आदेश सीईओ जनपद को दिया था। इसी के आधार पर कार्रवाई की गई।

हालांकि इससे पूर्व संबंधित शिक्षाकर्मियों को अपने मूल प्रमाण पत्र जमा करने को कहा गया था, लेकिन दो के सिवा किसी ने भी कागजात जमा नहीं किये। इस कार्रवाई के बाद बर्खास्त ११ शिक्षाकर्मियों ने अधिवक्ता अमित शर्मा के माध्यम से हाइकोर्ट में सीईओ के आदेश को चुनौती दी। अपीलार्थियों का कहना था कि उनके साथ प्राकृतिक न्याय नहीं किया गया है।

कायदे से बर्खास्तगी से पहले उनको सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसे तर्कसंगत मानते हुए जस्टिस सतीश अग्निहोत्री ने बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त करते हुए जिलाधीश कोरबा को निर्देश दिया है कि संबंधितों को फिर से सुनवाई का मौका दिया जाये। दोबारा जांच में भी अगर दोषी पाया गया तो इन्हें काम से निकाल दिया जाये।

बर्खास्त ११ शिक्षा कर्मियों की अपील के बाद चार अन्य ने भी संबंधित आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली, जिस पर सुनवाई के बाद जस्टिस सुनील कुमार सिन्हा ने कल अपना फैसला सुनाया। उन्होंने भी आदेश को निरस्त करते हुए अपीलार्थियों को मौका दिये जाने का निर्देश दिया।

फैसले का अक्षरश: होगा पालन
जिलाध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने इस संबंध में पूछे जाने पर बताया कि उन्हें माननीय न्यायालय के फैसले की प्रति नहीं मिली है। इस संबंध में जो भी आदेश होगा, उसका अक्षरश: पालन किया जायेगा। श्री अग्रवाल ने यह भी कहा कि वे एडीएम द्वारा की गई जांच से पूरी तरह संतुष्ट हैं। संबंधित शिक्षा कर्मियों को दोषी पाए जाने पर ही उक्त कार्रवाई की गई थी। सीईओ जनपद पंचायत कोरबा ने इन्हें बर्खास्त करने में क्या प्रक्रिया अपनाई इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। वे पूर मामले को फिर से देखकर न्यायालय के आदेश के मुताबिक आगे की कार्रवाई करेंगे।





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