लंदन.हाल में हुए अध्ययन के अनुसार खुद अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करना खतरनाक साबित हो सकता है। इससे भले ही शुगर लेवल कंट्रोल हो जाए, लेकिन साथ ही कुछ और नुकसान भी हो सकते हैं।
' ब्रिटिश मेडिकल जर्नल' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक टाइप-2 डायबीटीज के मरीजों में अपना ग्लूकोज लेवल चेक करने के बाद तनाव बढ़ने की आशंका ज्यादा होती है। गौरतलब है कि दुनिया भर में लाखों लोगों को टाइप-2 डायबीटीज है। इसमें कुदरती तौर पर बनने वाला इंस्युलिन बनना बंद हो जाता है, जिससे शरीर में मौजूद शुगर से एनर्जी नहीं मिल पाती है। हालांकि, अधिकांश रोगियों को इंस्युलिन लेने की जरूरत नहीं होती। लेकिन जो पेशंट घर पर अपना शुगर लेवल चेक करते रहते हैं उन्हें बेचैनी और टेंशन की शिकायत होने लगती है। स्टडी के अनुसार लगातार शुगर लेवल चेक करने से कोई खास फायदा भी नहीं होता।
यूनिवर्सिटी ऑफ अल्स्टर के डॉ. मॉरिस ओ केन और उनकी टीम ने एक साल चले अपने शोध में पाया कि इस तरह जांच करने से हाइपोग्लाइसीमिया के अटैक में कोई बड़ी कमी नहीं आई। इस तरह के अटैक में ब्लड शुगर का लेवल इतना कम हो जाता है कि दिमाग के सामान्य कामकाज पर भी असर पड़ने लगता है। एक दूसरी स्टडी में डॉ. जूडिथ साइमन की अगुवाई वाले दल ने भी बताया कि इस तरह की जांच से टाइप-2 डायबीटीज रोगियों की हेल्थ में कोई बड़ा सुधार नहीं होता।