नई दिल्लीकिसानों के लिए घोषित 60 हजार करोड़ रुपए की कर्जमाफी योजना के पेंच समझना आसान नहीं है। कृषि मामलों पर गठित संसदीय समिति की समझ में भी यह योजना पूरी तरह से नहीं आई और उसे वित्त मंत्रालय से कई सवाल पूछने पड़ गए। साथ ही समिति ने कहा है कि योजना के क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।
समिति ने वित्त मंत्रालय को कुछ सुझाव भी दिए हैं। यदि इन्हें मान लिया गया तो कर्ज चुकाने वाले किसानों को फायदा होगा। प्रो. रामगोपाल यादव की अध्यक्षता वाली इस समिति में प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन, किसान नेता शरद जोशी, डॉ. एम.एस. गिल और रॉनेन वर्मा शामिल हैं।
योजना ने खींचा ध्यान :
लोकसभा में पेश रिपोर्ट में समिति ने कर्जमाफी योजना पर कई सवाल पूछे हैं। अपनी सिफारिशों में उसने कहा है कि इस योजना ने सभी लोगों का ध्यान खींचा है, लेकिन इसके कई पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
समिति के सवाल
>> योजना का क्रियान्वयन कैसे होगा? >> कर्ज माफी की पात्रता क्या होगी? >> कब से कब तक के कर्ज माफ होंगे? >> यह कर्ज माफी को-ऑपरेटिव रिवाइवल पैकेज से अलग है या नहीं? >> जिन किसानों ने आधा कर्ज वापस कर दिया है, उन्हें क्या लाभ मिलेगा?
चार फीसदी की दर पर मिले कर्ज
समिति ने सुझाव दिया है कि जिन किसानों ने सूदखोरों से कर्ज लिया है, उन्हें बैंक 4 फीसदी ब्याज दर पर कर्ज मुहैया कराए, ताकि वे सूदखोरों के चंगुल से बाहर निकल सकें। बैंकों को होने वाला नुकसान सरकार को उठाना चाहिए। समिति का सुझाव है कि कर्ज चुकाने वाले किसानों को भी लाभ मिलना चाहिए। ऐसे किसानों को सरकार अगले तीन साल के लिए ब्याजमुक्त कर्ज मुहैया कराए, ताकि उन्हें यह न महसूस हो कि कर्ज अदा कर उन्होंने कोई गलती की है।