Vaama
Relationships Relationships पैरेंटिंग.
बच्चों के साथ बच्च बनकर हम सभी कई बार गलतियां कर बैठते हैं। मौके की नजाकत को न भांपते हुए हम कुछ ऐसे शब्द कह जाते हैं जिनपर आगे चलकर अफसोस होता है। लेकिन बच्चों से हमारे संबंध इसके बावजूद और बेहतर हो सकते हैं। माफी मांगकर आप न सिर्फ अपनी जिम्मेदारी का अहसास करते हैं बल्कि बच्चे को माफ करने की प्रेरणा भी देते हैं।
* सबसे पहले तो मानिए कि वाकई आप गलती पर थे, वर्ना आपके सॉरी कहने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। हालांकि माफी सिर्फ शब्दों सेही नहीं वरन दिल से होनी चाहिए।
* अगर आप खुद महसूस करते हैं कि आप सोच सकने की स्थिति में नहीं हैं तो अकेले कुछ वक्त गुजारिए। सोचिए कि गुस्से के ऐसे हालात बने क्यों?
* अपने किए पर पछतावा मात्र करने से ही काम नहीं बनता। सोचिए कि अगर आप बचपन के उस दौर में होते तो आपके बालमन पर क्या प्रभाव पड़ता। खुद से कहिए कि आपने गलती से ही बच्चे को बुरा-भला कह दिया था।
* बच्चे को बुरा कहकर आप अपनी गलती पर परदा तो नहीं डाल सकते। लेकिन बच्चे को भी उसकी गलती जरूर बताएं, मसलन आप बच्चे को बता सकते हैं कि रात में देर तक टीवी देखने या फिर सुबह देर तक सोने से बस छूट जाने पर ही उसे टोका गया है। अगर वह खुद में थोड़ा बदलाव करे ऐसी स्थिति कभी नहीं आने वाली है।
* खुद भी सोचें और बच्चे से भी पूछें कि आपके रिश्ते बेहतर कैसे बन सकते हैं या फिर आप ऐसी स्थिति निर्मित होने से बचने के लिए क्या करें? यह बात तो तय है कि पैरेंट्स और बच्चों दोनों को एडजस्ट करना होगा। माफी मांगने से छोटा तो कोई नहीं होता। खासतौर पर बच्चे से मांगने से तो आप माफ करने के उसके गुण का विकास ही करेंगे।
* याद रखिए कि आप परफेक्ट नहीं हैं और गलती किसी से भी हो सकती है। जरूरी है कि आप गलती को समझिए और उसका अहसास कर आगे बढ़िए। याद करिए कि बतौर अभिभावक आप कितनी अच्छी चीजें पहले कर चुके हैं। बस इसे याद करते हुए हाल ही में मांगी गई माफी को भी इन्हीं अच्छी बातों में शामिल कर लीजिए।