क्या आप बेकरार हैं किसी ऐसी जगह घूमने के लिए जो खूबसूरत तो हो हीं, लेकिन जरा लीक से हटकर भी। इन स्थानों पर आकर आप गहरी वादियों, खूबसूरत महलों और पारंपरिक जगहों समेत अंग्रेजों के जमाने का भी थोडा-बहुत अंदाजा लगा सकते हैं।
कुर्ग
इस जगह का पुराना नाम कोडाईमालेनाडू है, जिसका मतलब है ढलवां पहाड़ी पर फैला घना जंगल। कर्नाटक के इस दक्षिण-पश्चिम जिले में आकर आप कुदरत की खूबसूरती को काफी करीब से निहार सकते हैं। कुर्ग में चाय-कॉफी का बढ़िया प्लांटेशन किया जाता है, ये स्थान कुर्ग को न भूलने वाला डेस्टिेशन बनाते हैं। पश्चिमी घाट पर स्थित कुर्ग में टीक वुड के जंगलों की भरमार है। कुर्ग में कई जन जातियां निवास करती हैं। यहां का इरुप्पा फॉल, ब्रहमगिरी ट्रैक, राजा की सीट और नागरहोल नेशनल पार्क देखने लायक स्थानों में हैं।
कुंभलगढ़
यह जगह अपने नाम से ही किसी किलेनुमा जगह की तस्वीर पेश करती है। यहां का राम पोल यानी किले का गेट देखकर ही आप अंदर के माहौल का अंदाजा लगा सकते हैं। 15 वीं शताब्दी में बने इस किले की दीवार तकरीबन 36 किलोमीटर लंबी है, जो ग्रेट वॉल ऑफ चाइना के बाद दुनिया की सबसे लंबी दीवार है। इसके अंदर 360 मंदिर हैं, जिसमें से 300 तो जैन मंदिर हैं। यह मेवाड़ के राजा महाराणप्रताप का जन्म स्थान भी है। उदयपुर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह जगह अरावली पर्वत श्रंखला के पास है। यहां का बड़ा महल और वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी भी देखने लायक है।
पिंजोर
यह छोटी सी जगह अपने मुगल गरडस के लिए सबसे ज्यादा मशहूर है। चंडीगढ़ के पास स्थित यह स्थान समुद्र से 1800 फीट की ऊंचाई पर है। यहां से शिवालिक पर्वत श्रंखला का नजारा देखा जा सकता है। खास बात यह है कि यह जगह पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है। पिंजोर के यविंद्र गर्ा्डस, टैरेस गार्डन, राजस्थानी मुगल महल, शीश महल, रंग महल, क्यूबिकल जल महल और वॉटर फॉल्स काफी खूबसूरत हैं।
परवानू
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित परवानू वैसे तो कालका के नजदीक है, लेकिन एक नदी इसे कालका से अलग करती है। हिमाचल का सबसे लंबा लेक रेणुका यहां मौजूद है, इसे देवी रेणुका के नाम पर रखा गया है। गुरखा फोर्ट के अवशेष भी यहां आकर आप देख सकते हैं। परवानू जाने का सबसे अच्छा वक्त जुलाई से सितंबर के बीच है।
हसन
बेंगलुरू से 194 किलोमीटर दूर हसन जैनियों कापवित्र तीर्थस्थल है। यह अपने मंदिरों के लिए मशहूर है। भगवान बाहुबली की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति यहीं है। हर 12 वर्ष में यहां महामस्तकाभिषेक होता है जिसमें 1000 वर्ष पुरानी मूर्ति को दूध से नहलाते हैं।