भोपाल. शहर में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते यहां की हरियाली पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नगर निगम द्वारा राजधानी के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए पौधे कई जगहों पर झुलसने लगे हैं। स्थिति और भी बिगड़ सकती है, जब तापमान में और बढ़ोतरी होगी।
यह पौधे हरियाली महोत्सव के दौरान लगाए गए थे। इनमें से कई देखरेख के अभाव में मर गए हैं तो कई तेज गर्मी से झुलस रहे हैं। स्थिति का एक पहलू यह भी है कि इन पौधों की सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते। साथ ही नियमित सिंचाई व्यवस्था नहीं होने से भी यह सूख जाते हैं। हालांकि कई स्थानों पर तो इनकी अच्छी देखभाल की जा रही है, लेकिन बढ़ती गर्मी के आगे यह कुछ स्थानों पर हालत बहुत खराब है। वहीं लोगों की उदासीनता के कारण भी कुछ स्थानों पर किया गया पौधारोपण बेकार हो गया है।
सुरक्षा के इंतजाम : नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इन पौधों की सुरक्षा के लिए कई स्थानों पर ट्री गार्ड लगाए जाते हैं व कई स्थानों पर आवारा पशुओं को रोकने जालियां लगवाई जाती हैं। अधिकारी स्वीकार करते हैं कि गर्मी के तेज धूप के कारण भी पौधे मर जाते हैं।
सिंचाई की व्यवस्था: नगर निगम मुख्य मार्गाें पर लगवाए गए पौधों की सिंचाई नियमित रूप से कराने का दावा करता है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसा नहीं होता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि गर्मी से झुलसे पौधों में दोपहर में पानी दिए जाने से भी वे खराब हो जाते हैं।
बजट: नगर निगम के अनुसार हरियाली महोत्सव में पेड़ लगाने इस साल 25 से तीस हजार रुपए खर्च किए गए थे। लगाए गए पौधे वन विभाग की नर्सरी से खरीदे गए थे और कुछ पौधे नगर निगम ने अपनी नर्सरी से भी उपलब्ध कराए थे।
स्थानीय लोगों की उदासीनता
लोगों की पर्यावरण के प्रति उदासीनता के चलते भी यह योजनाएं सफल नहीं हो पाती हैं। निजी कॉलोनियों में करवाए गए पौधारोपण और सुरक्षा के इंतजाम नगर निगम नहीं करता है, इसके लिए स्थानीय लोगों को भी मिलकर प्रयास करने चाहिए। नगर निगम द्वारा स्कूलों में कराए गए पौधारोपण की जवाबदारी स्कूल प्रबंधन की होती है। साथ ही लोग पेड़ों की सुरक्षा के लिए लगाई गई जालियों को भी तोड़ देते हैं, जिससे आवारा मवेशी उन्हें नष्ट कर देते हैं।