जयपुर. जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने भूमि की आरक्षित दरें बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी हैं। पिछले तीन साल में जमीनों के भाव बढ़ने और जयपुर रीजन में शामिल हुए नए 247 गांवों में आरक्षित दरें लागू नहीं होने से जेडीए यह कदम उठा रहा है। ये दरें 24 मई से लागू होंगी।
जेडीए अधिकारियों के अनुसार पिछली बार तीन साल पहले 24 मई 2005 को आरक्षित दरें अपडेट की गई थीं। हर तीन साल में आरक्षित दरों को अपडेट करने का नियम है, इसलिए 24 मई से पहले नई दरें तय करना जरूरी है। जानकार सूत्रों के अनुसार इस बार आरक्षित दरें भूमि के बाजार भाव और डीएलसी दरों के बीच रखी जाएगी। इसके चलते कई इलाकों में दो गुना तो कई जगह तीन गुना तक दरें बढ़ सकती हैं। आरक्षित दरें बढ़ने से जमीन के भावों पर सीधा असर पड़ेगा। संस्थाओं को भी भूआबंटन महंगी दरों पर होगा।
वर्तमान में जहां आरक्षित दरें लागू हैं, वहां 20 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी संभावित है। जेडीए अधिकारियों का तर्क है कि पिछले तीन साल में शहर में कहीं तीन बार तो कहीं चार बार तक जिला प्रशासन ने डीएलसी दरें बढ़ाई हैं। जेडीए को भूमि आबंटन के दौरान अपेक्षाकृत कम कीमत मिल रही है, क्योंकि संस्थाओं को जमीन आरक्षित दर से आबंटित होती है। जिला प्रशासन ने हर कॉलोनी और हर क्षेत्र में सड़कों की चौड़ाई के हिसाब से आवासीय व व्यावसायिक दरें तय की हैं। इसलिए जेडीए ने भी कॉलोनी और सड़क के हिसाब से दरें निर्धारित करने का निर्णय किया है।
247 गांवों में दरें निर्धारित करना जरूरी
जेडीए अफसरों के मुताबिक हाल ही रीजन में शामिल हुए 247 गांवों में जमीन की आरक्षित दरें निर्धारित नहीं हैं, जबकि अब भविष्य में होने वाले भूमि आबंटन नए इलाकों में ही होंगे। वर्तमान में सिर्फ 50 कॉलोनियों की आरक्षित दरें निर्धारित हैं। इसके अलावा 12 जोन में से सिर्फ 6 जोनों में ही कॉलोनीवार दरें निर्धारित हैं, बाकी पूरे क्षेत्र में एक ही दर है। यह दर अलग-अलग जोनों में 2300 से 3300 रुपए प्रतिवर्ग गज के बीच है। कॉलोनी और सड़क के हिसाब से दरें निर्धारित नहीं होने से अच्छी मंौके की जमीन भी जेडीए को सस्ती दर पर आबंटित करनी पड़ती है।
जमीन के भाव बढ़ेंगे
आरक्षित दर बढ़ने से शहर में जमीन के भाव बढ़ेंगे। आरक्षित दर के आधार पर तय होने वाली भूखंडों की लीजमनी भी महंगी हो जाएगी। भूमि कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले जिला प्रशासन ने डीएलसी दरें बढ़रई, अब आरक्षित दरें बढ़ाने की तैयारी है। इसका असर जमीन की कीमतों पर पड़ेगा। शहर के बाहर बसी जेडीए की आवासीय योजनाओं में आरक्षित दर बढ़ने से आसपास के इलाकों में जमीन के भाव बेकाबू हो सकते हैं। फागी रोड पर रोहिणी नगर, सीकर रोड पर आनंदलोक, रजत विहार व आगरा रोड पर अंबेडकर नगर योजनाओं में वर्तमान दरें ही बाजार भाव से ज्यादा है। यहां जेडीए की दर 1500 से 2300 रुपए प्रतिवर्ग गज चल रही हैं, जबकि आसपास के इलाकों में जमीन का बाजार भाव इससे कम है।
महीने भर बाद लागू होंगी नई दरें
जेडीए के मुख्य राजस्व अधिकारी एम.एल.गुप्ता ने कहा कि बढ़ी हुई दरें 24 मई से लागू कर दी जाएंगी। सभी सबरजिस्ट्रार कार्यालयों से डीएलसी दरें मंगवा ली गई हैं। जमीन के बाजार भाव और डीएलसी दरों के मुकाबले आरक्षित दर बहुत कम है। इस बार 20 से 30 प्रतिशत तक आरक्षित दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है। तीन साल में दरें अपडेट नहीं करने पर 10 फीसदी की बढ़ोतरी करने का प्रावधान तो वैसे ही है, लेकिन पिछले तीन साल में डीएलसी दरें भी काफी बढ़ चुकी हैं। इसलिए पूरे शहर की आरक्षित दरें नए सिरे से निर्धारित करने की आवश्यकता है।
जेडीए की ओर से जमीन की आरक्षित दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी से जनप्रतिनिधि सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि दरों में 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई तो वे इसका विरोध करेंगे। विधायकों के अनुसार जेडीए की इस कार्रवाई से राजधानी में जमीन के भाव और तेज हो जाएंगे।
दरें नहीं बढ़ाएं
जेडीए को जमीनों की रिजर्व प्राइस (आरक्षित दर) नहीं बढ़ानी चाहिए। इससे जमीनों के भाव बढ़ेंगे। रिजर्व प्राइस 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ाई गई तो विरोध किया जाएगा।
-मोहनलाल गुप्ता, विधायक
जमीनें महंगी हो जाएंगी
रिजर्व प्राइस बढ़ने से जमीनें और महंगी हो जाएंगी। राज्य सरकार ने जमीनों के भाव पहले ही आसमान पर पहुंचा दिए हैं। गरीब व्यक्ति के लिए मकान बनाना मुश्किल हो गया है। जेडीए ने रिजर्व प्राइस बढ़ाई तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
- ब्रजकिशोर शर्मा, विधायक
आरक्षित दरें एक समान न हों
रिजर्व प्राइस बढ़ती है तो जमीनें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएंगी। आरक्षित दरें सभी जगह एक समान नहीं होनी चाहिए। किस जगह भूमि की कीमत क्या है, उसी के हिसाब से जमीनों की दरें तय होनी चाहिए। आरक्षित दरें 20 से 30 प्रतिशत बढ़ीं तो इसका विरोध करेंगे।
-नवरतन राजोरिया, विधायक
सरकार ध्यान नहीं दे रही
चार वर्ष में जमीनों के भाव आसमान पर पहुंच गए हैं। इसके बावजूद सरकार आम जनता के हितों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। जिन संस्थाओं के पास जमीन नहीं है, आरक्षित दरें बढ़ने से उन्हें जमीन महंगी मिलेगी। रिजर्व प्राइस बढ़ी तो इसका विरोध किया जाएगा।
-लालचंद कटारिया, विधायक