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फिर सक्रिय हुए किडनी सौदागर

जयपुर.liverप्रदेश की राजधानी से रोगियों को चेन्नई ले जाकर किडनी प्रत्यारोपण कराने वाला गिरोह फिर सक्रिय हो गया है। किडनी रैकेट के सदस्य ई-मेल तथा इंटरनेट के माध्यम से किडनी की खरीद फरोख्त करते हैं। इस तरह की जानकारी सामने आने पर पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) भूपेंद्र साहू ने जांच के आदेश दिए हैं। बताया जाता है कि गिरोह में कुछ सर्जन भी शामिल हैं।

इस तरह पता चला पुलिस को : साहू ने बताया कि जयपुर में किडनी रोगियों से दलालों द्वारा संपर्क किए जाने तथा चेन्नई में किडनी लगाने के बारे में एक जने ने शिकायत की। उसकी पत्नी की किडनी खराब है और शहर के प्राइवेट अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। अस्पताल में उसकी पत्नी को एक युवक ने चेन्नई में रहने वाले दलालों के नंबर दिए। दलालों ने किडनी प्रत्यारोपण कराने के नाम पर 15 लाख रुपए मांगे। इस पर पीड़िता के पति ने पुलिस अधीक्षक दक्षिण को इस बारे में बताया। तब एसपी ने जांच के आदेश दिए। किडनी डोनर भुवनेश्वर तथा हैदराबाद के रहने वाले हैं।

चेन्नई जाएगी पुलिस टीम : किडनी रैकेट के बारे में पता चलता है तो जांच के लिए चेन्नई पुलिस टीम भेजी जाएगी। किडनी रैकेट के जयपुर में सक्रिय होने संबंधी जांच एक सब इंस्पेक्टर को सौंपी गई हैं।

वेबसाइट पर चलता है खरीद फरोख्त का धंधा : किडनी रैकट में शामिल लोग एक वेबसाइट का उपयोग करतें है। इस वेबसाइट के माध्यम से ही किडनी के दलालो से किडनी दाता संपर्क करता है। वहीं दलाल किडनी की डायलिसिस की सुविधा वाले अस्पतालों में जाकर मरीजों से संपर्क कर उसकी जरुरतों का पता लगाकर उससे घनिष्ठता बढ़ातें हैं तथा किड़नी उपलब्ध कराने का वादा कर सौदा तय करते हैं। सौदा तय होने के बाद मरीज के ब्लड ग्रुप के अनुसार दलाल वेबसाइट के माध्यम से किडनी संबंधित संदेश डाल देते हैं। संदेश पढ़कर किडनीदाता अपनी किडनी बेचने के लिए दलालों से वेबसाइट के माध्यम से ही संपर्क करतें हैं तथा साइट पर उनका मोबाइल नंबर डाल देतें हैं। इस वेबसाइट को प्रतिबंधित करने की सिफारिश मुंबई पुलिस सरकार को कर चुकी है।

पहले भी हो पकड़ा जा चुका है गिरोह : राजस्थान से किडनी रोगियों को चेन्नई ले जाकर वहां के निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह का मुंबई पुलिस ने अक्टृबर 2007 में पर्दाफाश कर गिरोह के मास्टरमाइंड डाक्टर को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार डाक्टर पलानी रविचंद्रन (42) तथा उसके चार साथी गरीब लोगों को किडनी बेचने के लिए तीन से चार लाख रुपए देने का लालच देते थे। ये लोग मुंबई, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार (बर्मा) में सक्रिय थे। किडनी देने वालों को चेन्नई स्थित दो प्राइवेट अस्पतालों में ले जाया जाता था। जहां किडनी निकाली जाती थी।

किडनी किंग डाक्टर अमित के साथी तो नहीं
पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि जिन लोगों ने किडनी देने के लिए संपर्क किया वे किडनी किंग डॉ़ अमित के साथी तो नहीं। जांच में उन दोनों लोगों के मोबाइल नंबर भी मिल गए हैं जिन्होंने किडनी देने के लिए संपर्क किया था। मोबाइल नंबरों के आधार पर पुलिस डाक्टर अमित से संपर्को का पता लगा रही हैं।





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