इंदौर. खजराना जागीर की 104 एकड़ जमीन पर शासन का स्थगन हटने और हाई कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद एमपी हाउसिंग बोर्ड ने सक्रियता बढ़ा दी है। बोर्ड पूर्व में बना प्लान बदलकर नया बनाएगा और गरीबों के लिए अधिक जोर देगा।
वर्ष 2005 में जब बोर्ड ने उक्त जमीन पर आवासीय योजना तैयार की थी तब करीब 18 सौ मकान बनाने का प्रावधान था। बोर्ड के शहर वृत्त के अधीक्षण यंत्री आर.के. निगम का कहना है तब प्रारंभिक तौर पर अनुमान के आधार पर प्लान बनाकर कलेक्टर को भेजा था। करीब साढ़े तीन साल में स्थितियां बदल गई हैं और चूंकि हर हालत में जमीन मिलना तय है इसलिए अमल के मान से विस्तृत प्लान बनाया जाएगा।
इसके पहले नए सिरे से जमीन का भौतिक सर्वेक्षण होगा जिसमें भूखंडों की संख्या निर्धारित कर देखा जाएगा कि आसपास के क्षेत्रों को देखते हुए किस तरह सड़कें बनाई जाएं। बोर्ड ने तय किया है कि जितने भी भूखंड होंगे उनमें अधिकांश कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए होंगे। श्री निगम के मुताबिक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबी होती है। उसे देखते हुए करीब डेढ़ साल में योजना पर अमल कर प्लाट आवंटन की प्रक्रिया संभावित है।
अधिसूचना जारी : कलेक्टर ने भू-अर्जन अधिनियम की धारा 4, 17 (1) के तहत अधिसूचना जारी कर दी जिसके तहत 4 मई तक आपत्ति प्रस्तुत की जा सकती हैं।
आगे की प्रक्रिया
आपत्तियों के निराकरण के बाद कलेक्टर द्वारा भू-अर्जन अधिनियम की ही धारा 6 के तहत एक और अधिसूचना जारी की जाएगी जिसकी अवधि एक माह की होगी। इसके तहत मुआवजा निर्धारण होगा और उस दौरान जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तय करेगा ले-आउट
इसके बाद ले-आउट बनाया जाएगा जो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी के बाद प्लाट आवंटन की कार्रवाई होगी।