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पावर के लिए नरम पड़े रमन-रमेश

रायपुर.r केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्री रमेश ने एनटीपीसी के सीपत संयंत्र में 500 विस्थापितों को रोजगार पर सहमति दे दी है। उनके सकारात्मकरुख की वजह से मुख्यमंत्री डा. सिंह ने भी उन्हें आश्वस्त किया कि एनटीपीसी को हसदेव बांगो बांध से पानी दिया जाएगा। यह व्यवस्था अस्थायी तौर पर होगी। एनटीपीसी को महानदी से लगातार पानी मिले, इसके लिए केंद्रीय मंत्री ने नदी पर एनीकट बनाने की रजामंदी भी दी है।

केंद्र सरकार से अरसे से इस बात पर विवाद था कि सीपत संयंत्र को हसदेव बांगो से अनुबंध के अनुरूप पानी की सप्लाई हो। पहले संयंत्र को पानी देने के लिए राज्य शासन ने अनुबंध किया था। बाद में रमन सरकार ने किसानों की तकलीफ के मद्देनजर बांध से पानी सप्लाई बंद कर दी। एनटीपीसी अड़ा था कि उसे हसदेव बांगो जलाशय से ही पानी दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने जयराम रमेश के सामने व्यावहारिक दिक्कत को सामने रखा। उन्होंने साफ कहा कि हसदेव बांगों से संयंत्र को पानी सप्लाई जारी रही तो किसी भी दिन विस्फोटक स्थिति निर्मित हो जाएगी और किसान सप्लाई बंद करवा देंगे।

उन्होंने प्रस्ताव रखा कि महानदी में एनीकट बनाकर संयंत्र के लिए पानी की स्थायी व्यवस्था की जाए। इससे अगर बिजली महंगी होती भी है तो उसकी चिंता न करें। महंगी बिजली कोई नहीं खरीदेगा तो भी छत्तीसगढ़ में खपत हो जाएगी।

मुख्यमंत्री की बात से श्री रमेश सहमत हो गए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जल आयोग से सर्वे कराकर देखा जाएगा कि महानदी से पानी लाने में कितना खर्च आएगा और यह व्यावहारिक है या नहीं। आयोग से तीन महीने में रिपोर्ट मांगी जाएगी। यह पहला मौका है जब केंद्र ने राज्य की इस बात पर सहमति जताई है। इसके पहले तक इस बात पर विवाद बना ही रहता था। विस्थापितों को नौकरी देने के विवाद ने इस झगड़े को और हवा दे दी थी। राज्य शासन ने कह दिया था कि जब तक विस्थापित ग्रामीणों को नौकरी नहीं दी जाएगी, राज्य भी पानी नहीं देगा।

सीपत का एनटीपीसी प्लांट इसका खामियाजा भुगत रहा है। 500 मेगावाट का यह पावर प्लांट नौ महीने से आंदोलन और पानी नहीं मिलने की वजह से बंद है। मुख्यमंत्री ने श्री रमेश के सकारात्मक रुख को देखते हुए कहा कि राज्य शासन संयंत्र को हसदेव बांगों से फिलहाल पानी देने के लिए तैयार है। इसके लिए एनटीपीसी को दोबारा आवेदन करना होगा। श्री रमेश ने कहा कि दो दिनों के भीतर औपचारिकताएं पूरी कर राज्य शासन को आवेदन दे दिया जाएगा।

किसानों का पानी नहीं लेंगे

सीएम हाउस के बाहर पत्रकारों से चर्चा करते हुए श्री रमेश ने बताया कि देशभर में एनटीपीसी के 30 हजार मेगावाट के प्रोजेक्ट धरातल पर हैं, लेकिन केवल छत्तीसगढ़ में ही प्लांट शुरु नहीं हो सका है। केंद्र और राज्य के बीच विवाद की वजह से यह देर हुई। एनटीपीसी के इस प्लांट में 2980 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। श्री रमेश ने बताया कि सात सालों में हसदेव बांगो के कैचमेंट एरिया में बारिश में कमी आई है। उसकी क्षमता 50 प्रतिशत घट गई है, इसलिए विवाद हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों का एक बूंद पानी नहीं लेंगे।





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