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भूमिका के साथ फेस्टिवल सम्पन्न

ग्वालियर. g अन्तरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के अंतिम दिन फोरमैन की वन फ्ल्यू ओवर द कुकूज नेस्ट एवं श्याम बेनेगल की भूमिका फिल्म दिखाई गई। फेस्टिवल का समापन श्याम बेनेगल की फिल्म के साथ हुआ। इस अवसर पर फिल्म समीक्षक विनोद भारद्वाज ने फोरमैन की फिल्म की समीक्षा करते हुए कहा कि फोरमैन ने मानसिक रूप से बीमार लोगों की समस्याओं, भावनाओं को अनुभव कर इस फिल्म का निर्माण किया है। यह फिल्म हर दृष्टि से उम्दा है।

हम भी इंसान हैं

संसार जिन्हें पागल कहता है, वे भी दिल रखते हैं। वे भी समाज का अंग बन सकते हैं। निर्देशक फोरमैन ने अपनी फिल्म के माध्यम से इसी संदेश को दर्शकों तक पहुंचाया है। फिल्म का नायक एलिस पागल दिखता जरूर है, लेकिन पागल नहीं है। वह पागलखाने में आकर मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों को समाज का अंग बनाना चाहता है।

उन्हें हंसना, खेलना सिखाता है, लेकिन प्रशासन इसकी अनुमति नहीं देता है। विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस और सलमान खान अभिनीत क्योंकि फिल्म का मिलाजुला रूप फोरमैन की फिल्म में देखने को मिला। एलिस जब एक ऐसे व्यक्ति को बास्केटबाल खेलना सिखाता है, जो अपना हाथ नहीं उठा सकता। इस दृश्य को देखकर दर्शक स्वयं को करतल ध्वनि करने से न रोक पाए। निर्देशक ने फिल्म का समापन दर्शकों के मन को झकझोरते हुए किया है। पागलखाने के बेरहम प्रशासन के आगे फिल्म का नायक भी घुटने टेक देता है, लेकिन नायक का वह साथी, जिसे वह बास्केटबाल खेलना सिखाता है, उसकी गला घोंटकर हत्या कर देता है और पागलखाने की दीवार तोड़कर सदा के लिए बाहर निकल जाता है।

तुम्हारे बिना जी न लगे घर में

श्याम बेनेगल ने अपने चिर परिचित अंदाज में फिल्म भूमिका को बनाया है। मराठी नाटक पर आधारित फिल्म एक गाने तुम्हारे बिना जी न लगे घर में से शुरू होती है। फिल्म की नायिका स्मिता पाटिल और नायक अमोल पालेकर के जीवंत अभिनय ने फिल्म को कालजयी बना दिया है। 1977 का फिल्म फेयर अवार्ड प्राप्त इस फिल्म की पटकथा एक ऐसी बच्ची की दास्तां है जिसका पिता शराबी है और उसकी मृत्यु शराब पीकर हो जाती है।

फिल्म का नायक नायिका से उम्र में बहुत बड़ा है, वह अपने स्वार्थो के लिए नायिका का भावनात्मक, मानसिक, आर्थिक शोषण करता है। पारिवारिक कलह के कारण नायिका अन्य पुरुषों के सम्पर्क में आती है, लेकिन उसे मानसिक शांति नहीं मिलती है। दर्शक फिल्म से स्वयं को एक पल के लिए भी अलग नहीं कर पाते हैं।





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