नई दिल्ली. भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत राबर्ट ब्लैकविल ने कहा है कि परमाणु करार की विफलता से भारत-अमेरिका संबंधों में बहुत फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन भारत को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
ब्लैकविल ने एक कार्यक्रम में कहा कि यदि असैन्य परमाणु समझौता नहीं होता है तो इसकी कीमत अमेरिका को नहीं चुकानी पड़ेगी। भारत को जरूर अपनी भविष्य की ऊर्जा नीति में इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया के अन्य देशों से असैन्य परमाणु सहायता प्राप्त होने में भी दिक्कत होगी। पूर्व राजदूत ने कहा कि अमेरिका का कोई भी अगला राष्ट्रपति परमाणु समझौते में उतनी रुचि नहीं लेगा जितनी जार्ज डब्ल्यू बुश और उनके सहयोगियों की है।
ब्लैकविल ने कहा कि यदि अगले 20 से 25 वर्षो में द्विपक्षीय संबंधों की बात की जाए तो एशिया में केवल भारत ही है जिससे अमेरिका संबंध बरकरार रखना चाहेगा। इसका कारण उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक सिद्धांत और प्रवासी भारतीयों की भागीदारी को बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में गर्माहट अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है।