नई दिल्ली.
केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया है कि वह न तो किसानों के नए कर्ज माफ करेगी और न ही साहूकारों से लिए गए कर्ज की माफी के संबंध में उसके पास कोई योजना है। सरकार बजट में कर्ज माफी के लिए तय की गई भूमि की सीमा को भी नहीं बढ़ाएगी।
कृषि मंत्री शरद पवार ने लोकसभा में बताया कि ‘इस साल के आम बजट में घोषित 60,000 करोड़ रुपए के कृषि ऋण को माफ किए जाने का वचन पूरा होने तक हम नई जिम्मेदारी लेने की स्थिति में नहीं हैं।’ पवार ने कहा पहले हमें आम बजट में दी गई कर्ज माफी की योजना को लागू करने दें, फिर उसका परिणाम देखें। इस योजना के दायरे में छोटे और मझोले श्रेणी के 81 प्रतिशत से ज्यादा किसान आते हैं।
उन्होंने विपक्ष का यह दावा खारिज कर दिया कि कर्ज माफी की योजना में किसानों के साथ धोखाधड़ी हो रही है। बजट में कर्ज माफी की योजना को इस साल 30 जून तक लागू करने की बात कही गई है।
गौरतलब है कि बजट घोषणा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी ने इस योजना में अधिक से अधिक किसानों को शामिल करने की मांग की थी। राहुल गांधी ने तो भूमि की सीमा व कर्ज लेने की तिथि की सीमा को भी हटाने की मांग की थी।