भोपाल. दिन- सोमवार समय- दोपहर 2 बजे
स्थान- सिक्योरिटी लाइन, गोविंदपुरा
ट्रैफिक पुलिस का एक दल सूबेदार सुप्रिया पांडे के नेतृत्व में ज्योति टाकीज चौराहे पर तैनात था। वहां से निकली एक स्कूल बस के ड्राइवर को बनियान पहना देख दल ने बस का पीछा किया। सिक्योरिटी लाइन पर बस रोकी गई। केंद्रीय विद्यालय की बस में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दो जवान भी थे। ड्राइवर के पास बस या खुद से संबंधित कागजात नहीं थे।
पीछे से आ रही इसी स्कूल की दूसरी बस की जांच में भी कागज नहीं मिले। बस में सवार बच्चों को गरमी से परेशान देखकर ड्राइवरों को बस सहित हिदायत देकर छोड़ दिया गया, पर सुप्रिया पांडे का वहां मौजूद भास्कर संवाददाता से कहना था ‘ऐसे ही हालात किसी दुर्घटना की वजह बनते हैं। यह पता ही नहीं लगता कि ड्राइवर कौन है, उसकी पृष्ठभूमि क्या है, उसे गाड़ी चलाने का पर्याप्त अनुभव है या नहीं?’
ट्रैफिक पुलिस के अफसर भी स्वीकारते हैं कि कि कई ऐसे वाहनों के चालक अनेक कमजोरियों के शिकार हैं। कई की नजर इतनी कमजोर है कि वे मोटे लैंस के चश्मे से ही किसी तरह देख पाते हैं। कई की उम्र इतनी कम होती है कि उन्हें नियमानुसार ऐसे वाहन चलाने ही नहीं दिया जा सकता। एएसपी ट्रैफिक अरविंद सक्सेना ने बताया कि ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं।
जिनमें समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। स्कूल प्रबंधकों को भी अनेक बार पत्र लिखकर न्यायालय के निर्देश की जानकारी दी जा चुकी है। वे स्वीकारते हैं कि इसके बावजूद स्थिति में खास सुधार नहीं है। उनका कहना है कि स्कूलों द्वारा वाहन तथा ड्राइवर पर पर्याप्त नजर न रखने व अभिभावकों द्वारा भी ध्यान न देने से स्थिति बिगड़ती है।
कहते हैं स्कूल वाले
- बस आपरेटरों के साथ हमारा वैधानिक अनुबंध होता है। यदि किसी भी प्रकार की कोई शिकायत आती है तो उसपर कार्रवाई की जाती है।
प्रवक्ता, सेंट जोसेफ कान्वेंट स्कूल
स्कूल में लगी बसें भेल की हैं और बाकी अभिभावक अपनी सुविधानुसार बच्चों को भेजते हैं। बसों पर समय के अलावा किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं है।
-विजय कुमार, प्राचार्य जवाहर लाल नेहरू
बसें स्कूल की हैं। ड्राइवरों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के तहत की जाती है। अभिभावकों और बच्चों से यदि ड्राइवर की किसी भी प्रकार की शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाती है।
-एसएन राय प्राचार्य, महर्षि विद्या मंदिर