जयपुर. पिछले डेढ़ साल के दौरान डीएलसी दर दो बार बढ़ने से जमीनों के भाव पहले ही बढ़ गए हैं। अब आरक्षित दरें बढ़ने से जमीन के भाव आसमान छूने लग जाएंगे और आम आदमी का शहर में जमीन खरीदना मुश्किल हो जाएगा। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की योजनाओं में जमीन लेना भी कई लोगों की पहुंच से दूर हो जाएगा।
जेडीए की 24 मई से बढ़ने वाली आरक्षित दरों के खिलाफ शहर के नागरिकों के साथ ही पार्षदों ने विरोध की तैयारी शुरू कर दी है। इसके उलट जेडीए के अधिकारी वर्तमान आरक्षित दर व डीएलसी दर के बीच नई आरक्षित दर तय करने की बात कह रहे हैं।
किसी भी सूरत में नहीं बढ़ने देंगे भाव
पार्षदों ने जेडीए की आरक्षित दरें बढ़ाने की तैयारी को बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का कदम बताया है। वार्ड 56 की पार्षद आयशा सिद्दीकी ने कहा कि किसी भी हाल में जमीनों के भाव नहीं बढ़ने देंगे। राज्य सरकार ने पहले ही डीएलसी दरों में बार-बार परिवर्तन कर जमीनों के भाव आम आदमी की पहुंच से दूर कर चुकी है और अब रही-सही कसर जेडीए पूरी करना चाहता है।
वार्ड 39 के पार्षद कमल पहाड़िया ने कहा कि जेडीए के खिलाफ मुहिम चलाई जाएगी। पार्षद अर्चना शर्मा ने सद्बुद्धि यज्ञ कराने की बात कही। गिरिराज खंडेलवाल ने कहा कि महंगाई के दौर में आरक्षित दर बढ़ाकर जेडीए कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। अन्य पार्षदों ने भी महंगाई के विरोध में जगह-जगह नुक्कड़ नाटक करने की बात कही।
जेडीए का तीस प्रतिशत वृद्धि का विचार
जेडीए ने 4 जून, 2005 को पुरानी आरक्षित दर में दो से तीन गुना वृद्धि कर जमीनों के भावों में अचानक बूम ला दिया था। जेडीए अब इन दरों में करीब 30 प्रतिशत वृद्धि करने पर विचार कर रहा है।
दरों में तीन गुना अंतर होने की संभावना
आरक्षित दरें बढ़ने के साथ ही जमीनों के बाजार भाव भी बढ़ जाएंगे। राजधानी में पहले से ही कई इलाकों में डीएलसी दर व वहां के बाजार भाव में दुगुने का अंतर है। नई आरक्षित दरों के बाद कुछ क्षेत्रों में तो बाजार भाव व डीएलसी दर में तीन गुना तक का अंतर आ सकता है।
और महंगी होगी जमीन
आरक्षित दर में बढ़ोतरी करने के बारे में राजस्थान बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल प्रसाद गुप्ता का कहना है कि इससे संस्थाओं को महंगी दर पर जमीन मिलेगी, साथ ही नीलामी में बेचे गए भूखंडों पर वार्षिक लीजमनी में बढ़ोतरी हो जाएगी। बाहरी निवेशक सहित स्थानीय निवेशकों का नीलामी में जमीन खरीदने का रुझान कम होगा।
इसी प्रकार भूपट्टी आबंटन के लिए खरीदार को आरक्षित दर का दुगना भुगतान करना होगा। 2005 से पहले आरक्षित दर को सभी बातों का ध्यान रखकर निर्धारित किया जाता था, किंतु 2005 में पुन: निर्धारण करते समय आरक्षित दरों को बाजार भाव मानकर इन्हें संशोधित कर दिया। जेडीए अब उसी दर को आधार मानकर फिर से संशोधित करने जा रहा है।