जयपुर. ‘कहने को तो हम टीचर हैं, पर वेतन महज 2750 रु. और पोस्टिंग भी ऐसी मिली कि घर छोड़ना पड़ रहा है। ऐसे में नौकरी करना मुश्किल हो जाएगा।’ दबी जुबां में कुछ ऐसी ही पीड़ा जता रही हैं हाल ही नियुक्त हुई विधवा और परित्यक्ता कोटे की ज्यादातर महिला शिक्षिकाएं। शिक्षा विभाग ने 1496 विधवा-परित्यक्ताओं को अप्रशिक्षित शिक्षक के रूप में नियुक्ति दी हैं।
ज्यादातर शिक्षिकाओं को दूर-दराज इलाकों में मिली पोस्टिंग ने परेशानी में डाल दिया है। कईयों को अपने घर से काफी दूर नियुक्ति मिली है। आसरे की उम्मीद वाली यह नौकरी उनके लिए परेशानी का सबब बन गई है। कुछ को अपने छोटे बच्चे छोड़कर जाना काफी महंगा पड़ रहा है। कई को तो किराए में ही हजार रुपए खर्च करने पड़ेंगे। ऐसी स्थिति में नौकरी के दौरान ही बीएड या एसटीसी भी खुद के खर्च पर करने की मजबूरी है।
शिक्षक कर्मचारी संघों का कहना है कि पहले से ही नियति की मारी इन महिलाओं के साथ यह नाइंसाफी है। उनको शुरुआत में कम से कम पांच हजार रु. महीना वेतन तो मिलना ही चाहिए। आरपीएससी की ओर से कुछ समय पहले नियुक्त हुई महिला शिक्षकों को भी शहर के आसपास पोस्टिंग को प्राथमिकता दी गई थी, लेकिन इस बार साथ ऐसा नहीं हुआ।
शुरुआत कुछ कम हो सकती है, लेकिन बीएसटीसी, बीएड करने के साथ ही नियमित वेतनमान मिलने लगेगा। सेवा अवधि में सरकार इनके लिए और बेहतर का प्रयास करेगी।
-वासुदेव देवनानी, शिक्षा राज्यमंत्री
यह महिलाओं के साथ नाइंसाफी है। इससे ज्यादा तनख्वाह तो दिहाड़ी करने वाला मजदूर कमा लेता है। शिक्षिकाओं का साथ मिला तो संघ आंदोलन करेगा।
—नारायण सिंह, प्रवक्ता पंचायतीराज शिक्षक संघ
बेटी ने यह सोचकर आवेदन किया था कि घर के पास नौकरी मिल जाएगी। स्थान नहीं बदला तो दूसरा काम देखेंगे।
—रामकरण शर्मा, महिला शिक्षिका का पिता
सुभाष चौक
दूर-दराज के क्षेत्रों में नियुक्ति पाने वाली शिक्षिकाओं को घर के निकटवर्ती स्थान पर पोस्टिंग देनी चाहिए। उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे जिलों में तो हाल और भी खराब हैं।
—पुष्पेंद्र सोलंकी, शिक्षक संघ