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घड़साना गोलीकांड की जांच पूरी

जयपुर. श्रीगंगानगर जिले के घड़साना व रावला में करीब साढ़े तीन साल पहले किसान आंदोलन के दौरान हुए गोलीकांड की जांच पूरी हो गई है। जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अनूपचंद गोयल ने बताया कि वे अपनी रिपोर्ट करीब एक सप्ताह में राज्य सरकार को सौंप देंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री से समय मांगा गया है। आंदोलन अब भी जारी है।

इस प्रकरण में खास बात यह है कि इस बीच दो अन्य लोगों की भी मौत हुई थी, पर सरकार ने उन्हें पुलिस गोली या अत्याचार से होना नहीं माना। हालांकि सरकार ने इन दोनों मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया था। आयोग ने केवल चार लोगों की मौत की ही जांच की।

घड़साना व रावला में सिंचाई के पानी को लेकर आंदोलन के दौरान 27 अक्टूबर 2004 को पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए 11 फरवरी 2005 को न्यायमूर्ति केजड़ीवाल की अध्यक्षता में आयोग की घोषणा की।

आयोग को तीन महीने में जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपनी थी, लेकिन करीब दो महीने का समय आयोग को दफ्तर एवं स्टाफ वगैरह मिलने में ही निकल गए। बाद में सरकार ने आयोग का कार्यकाल 6 माह बढ़ा दिया। इसके बाद जांच कार्य पूरा नहीं होने पर आयोग का कार्यकाल बार-बार बढ़ता रहा।

इस बीच 16 दिसंबर 2006 को जस्टिस केजड़ीवाल का देहावसान होने से जांच कार्य करीब चार महीने रुका रहा। बाद में सरकार ने सोहेला गोलीकांड की जांच कर रहे जस्टिस अनूपचंद गोयल को रावला घड़साना की जांच भी सौंप दी।

घटनाक्रम
>> 27 सितंबर 2004 को घड़साना-रावला में किसानों का आंदोलन शुरू
>> 27 अक्टूबर 2004 को पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत। इनमें घड़साना में एक एवं रावला में 3 लोगों की मौत हुई।
>> 11 फरवरी 2005 को केजड़ीवाल जांच आयोग गठित।
>> 16 दिसंबर 2006 को जस्टिस केजड़ीवाल का निधन।
>> 19 अप्रैल 2007 को जस्टिस गोयल ने आयोग अध्यक्ष का पद संभाला।

आयोग की कार्यवाही
>> 126 लोगों के बयान दर्ज।
>> दो सौ से ज्यादा साक्ष्य पेश।
>> डेढ़ महीने से अधिक समय तक बहस चली।





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