जयपुर/बीकानेर.
प्राथमिक शिक्षा में 345 शिक्षकों के तबादलों के आदेश जारी होने के एक दिन बाद ही उन पर रोक लगा दी गई है। शिक्षामंत्री कालीचरण सराफ का कहना है कि मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना तबादले होने का सवाल ही नहीं उठता, जबकि शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि परीक्षाओं में व्यवधान से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।
शिक्षक तबादलों की सूचियों पर रोक के बारे में दोनों मंत्रियों की बातों में पूरी तरह विरोधाभास दिखा। सराफ ने कहा कि प्रतिबंध होने के बावजूद तबादले करना हास्यास्पद है। देवनानी ने कहा कि परीक्षा परिणाम तैयार करने और मौजूदा शिक्षा सत्र में व्यवधान रोकने के लिए फिलहाल तबादले रोके गए हैं। उनका कहना है कि सूचियां यथावत रहेंगी और इन्हें नए सत्र में प्रभावी किया जाएगा।
शिक्षक भटकते रहे
‘भास्कर’ में शिक्षक तबादलों की खबर छपने के बाद शिक्षक सोमवार दिनभर शिक्षा उपनिदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों में चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्हें यही जवाब मिलता रहा कि फिलहाल सूचियां नहीं आई हैं।
बिफर पड़े सराफ
सवाल- शिक्षकों के तबादलों पर रोक लगने की वजह?
- मुझे नहीं पता, फिलहाल मैं बाहर हूं।
चर्चा है आपने अडंगा लगाया है।
-नहीं तो। पता चला कि ये मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना किए गए।
आपकी नजर में जायज नहीं हैं तबादले?
- जब मुख्यमंत्री की अनुमति नहीं हो तो कैसे हो सकते हैं। वैसे इस समय तबादलों पर बैन भी है।
आपने देवनानी से इस बारे में बात की थी?
-नहीं। मैंने प्रमुख शासन सचिव सुधीर भार्गव से तबादलों पर मुख्यमंत्री की सहमति के बारे में जानकारी चाही थी।
पलट गए देवनानी
सवाल- तबादलों पर आपने रोक लगा दी है?
- नहीं तो।
निदेशक के.के.पाठक का कहना है, रोक लगाई है। क्या किसी दबाव में ऐसा किया?
-अस्थायी रोक लगाई है। फिलहाल परीक्षा परिणाम तैयार करने और सत्र में व्यवधान रोकने के लिए यह कदम उठाया है। इसमें किसी का दबाव नहीं है।
सूचियां निरस्त कर दी जाएंगी?
-नहीं, ये यथावत रहेंगी। नए सत्र में इन्हें प्रभावी किया जाएगा।
रोक लगानी थी तो तबादले किए क्यों?
- ताकि आवेदक तबादलों के बारे में आश्वस्त हो जाएं।