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मिलीभगत से ठगी

भोपाल, छिंदवाड़ा, गुना, बैतूल.b बैतूल जिले के बडोरा क्षेत्र में स्थित कृषि उपज मंडी में रोंढा सहकारी समिति गेहूं की खरीदी कर रही है। समिति द्वारा गेहूं खरीदने से इंकार करने पर किसानों को मजबूरन व्यापारी को समर्थन मूल्य से कम दाम पर (960 रु. प्रति क्विंटल) माल बेचना पड़ता है। इससे किसान परेशान हैं लेकिन व्यापारी खुश हैं।

किसानों का आरोप है कि समिति ऐसा जानबूझकर करती है। समिति परिचित किसान से खराब गेहूं भी समर्थन मूल्य पर खरीद लेती है,अन्यथा मापदंड का बहाना बनाकर मना कर देती है। समिति द्वारा खरीदी करने के बाद भी पैसा नहीं मिलने की समस्या से भी किसानों को जूझना पड़ रहा है। समिति अभी तक 3 करोड़ रुपए के गेहूं की खरीदी कर चुकी है,जबकि 20 लाख रुपए किसानों को देना शेष है। किसान पैसे के लिए चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई समितियां तो बारदानों की कमी के कारण गेहूं की खरीदी ही नहीं कर रही हैं।

सीहोर जिले में सोसायटी मरदानपुर द्वारा समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र पर तौल में अधिक गेहूं लेने का आरोप ग्राम रतनपुर के किसानों ने लगाया है। किसान संतोष यादव ने बताया कि खरीदी केंद्र पर 50 किलो तौल के हिसाब से किसानों का गेहूं तौला जा रहा है जिसमें 700 से 800 ग्राम तक गेहूं अधिक तौला जा रहा है।

खरीदी केंद्र के तौल कांटे पर बांट के साथ एक बोरी के स्थान पर दो बोरी रखी जा रही हैं, जिससे किसान का 500 ग्राम अनाज ज्यादा जा रहा है। वहीं गेहूं सूखने का हवाला देकर किसानों से 100 से 200 ग्राम तक गेहूं अलग से लिया जा रहा है। मरदानपुर खरीदी केन्द्र के प्रभारी रमेशचंद्र ठाकुर का कहना है कि किसानों का आरोप निराधार है। खरीदी केंद्र पर सही तौल की जा रही है। रतनपुर के किसान चाहते थे कि समर्थन खरीदी केंद्र रतनपुर में खोला जाए, जो हमारे लिए संभव नहीं था।

जावर कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य का खरीदी केंद्र नहीं होने से किसानों की फसल कम भाव पर खरीद कर मंडी के व्यापारी फायदा उठा रहे हैं। भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष बाबूलाल पाटीदार ने बताया कि शनिवार को करीब १५ ट्रैक्टर ट्राली एवं कई बैलगाड़ियों से क्षेत्र के किसान अपना गेहूं बेचने के लिए लाए थे, लेकिन मंडी और सहकारी समिति में समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं की गई, जिसका लाभ व्यापारियों ने उठाया और किसानों का गेहूं ७८५ से १क्5क् रुपए प्रति क्विंटल खरीदा गया। जबकि गेहूं का समर्थन मूल्य ११क्क् रुपए प्रति क्विंटल है। ग्राम मेहतवाड़ा के कृषक हरी सिंह का कहना है कि स्थानीय कृषि उपज मंडी में तो किसान का गेहूं जला बताकर व्यापारी कम दामोंे पर खरीद रहे हैं।

छिंदवाड़ा मंडी में सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर एफसीआई, मार्कफेड, नागरिक आपूर्ति निगम, नाफेड आदि सरकारी एजेंसियां खरीदी करती हैं। इसके लिए इन एजेंसियों ने गेहूं की औसत क्वालिटी का मापदंड तय कर रखा है। इस मापदंड में नहीं आने वाले गेहूं को खरीदी केन्द्र से लौटा दिया जाता है। जिसे व्यापारी कम कीमत पर खरीद कर अन्य खरीदी एजेंसियों को अधिक दाम पर बेच देते हैं। औसत क्वालिटी का मापदंड एजेंसियों की नजर में अलग-अलग है। इसका फायदा व्यापारियों और दलालों को मिलता है जबकि खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।

भारतीय किसान संघ के अजय शुक्ला बताते हैं कि मंडी में गेहूं की खरीदी नियमानुसार नहीं हो रही है। कृषि उपज मंडी के सचिव एके दुबे मानते हैं कि सरकारी एजेंसियां औसत क्वालिटी वाले गेहूं को ही समर्थन मूल्य पर खरीदती हैं।

गुना जिले में पाले से बर्बाद हुई गेहूं की फसल को जैसे तैसे मंडी में पहुंचाने में कामयाब हुए किसानों को मंडियों में व्यापारियों और खरीदी केंद्रों के अधिकारियों की चालबाजी का शिकार होना पड़ रहा है। समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए खोले गए केंद्रो पर किसानों के बजाए व्यापारी से माल खरीदा जा रहा है।

ऐसे होता है घोटाला

गेहूं बेचने के लिए जब कोई किसान सरकार द्वारा खोले गए समर्थन मूल्य के खरीदी केंद्र पर जाते हैं तो यहां तैनात कर्मचारी गेहूं को एफएक्यू ग्रेड का नहीं होने की जानकारी देकर किसान को चलता कर देते हैं। बाद में यही गेहूं व्यापारी औने -पौने दामों पर किसानों से खरीद लेते हैं। दिनभर में ऐसे सैकड़ों किसानों से खरीदा गया गेहूं शाम ढलने के बाद सरकारी खरीदी केंद्र पर तौल दिया जाता है। इस कारगुजारी के बाद हुए लाभ को खरीदी केंद्र के अधिकारी और व्यापारी आपस में मिल बांट लेते हैं। इस पूरे गोलमाल में प्रति क्विंटल करीब 100- 200रु. आसानी से लाभ कमाया जा रहा है।

मापदंड तय, पालन नहीं

भारतीय खाद्य प्रबंधन ने गेहूं की खरीदी के लिए कुछ मापदंड तय किए हैं। इसमें गेहूं में विजातीय तत्व(कचरा)0.75,अन्य खाद्यान-2.00,क्षतिग्रस्त दाने-2.00, थोड़ा क्षतिग्रस्त दाने-6.00,सिकुड़े टूटे दाने-7.00 नमी-12.00 प्रतिशत और मिट्टी प्रतिक्विंटल-1 किलो के करीब होना चाहिए। इससे अधिक होने पर खरीदी नहीं की जा सकेगी।





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