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जगरगुंडा तक बनेगी कांक्रीट रोड

दंतेवाड़ा. जिले के धुर नक्सली इलाके में चल रहे जगरगुंडा सलवा जुड़ूम शिविर को लगता है राज्य सरकार और पुलिस ने प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। ग्राम सुराज अभियान के पहले दिन सोमवार को सुबह 11.30 बजे खुद मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह शिविर में पहुंचे और दो घंटे से ज्यादा समय वहां रुककर मैदानी स्थिति को देखा। जगरगुंडा शिविर की तरफ जाने वाले तीनों मार्गो को नक्सलियों ने खाइयां खोदकर जगह-जगह प्रेशर बम लगा दिए हैं। अब शिविर तक कांक्रीट सड़क बनाने की तैयारी की जा रही है।

शिविर के लोगों से संपर्क का साधन हेलिकाप्टर ही बचा है। शिविर में खाद्यान्न का कोटा लगभग खत्म होने की सूचना के बाद 10 दिन पहले भारी फोर्स के साथ 3-4 महीने की जरूरत का खाद्यान्न शिविर में पहुंचाया गया। जेसीबी मशीनों के साथ गया दल रास्ते भर खोदी गई ट्रेंच भरते हुए शिविर में पहुंचा और वापस लौटा।

सोमवार को मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ सड़क संपर्क समेत शिविरों की दीगर समस्याओं पर विस्तार से बात की। इसी बैठक में दोरनापाल से व्हाया जगरगुंडा अरणपुर तक 75 किमी लंबी कांक्रीट सड़क बनाने के प्रस्ताव को लगभग मंजूरी मिल गई है। जगरगुंडा इलाके में फोर्स का दबाव भी बढ़ाने की तैयारी है। दक्षिण बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाके गंगालूर से बीजापुर के बीच कांक्रीट रोड का निर्माण कार्य करीब 60 फीसदी पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री शिविर से निकलकर काफी दूर पैदल भी गए। हेलिकाप्टर से आते समय उन्होंने इलाके का हवाई निरीक्षण किया।

शिविर में रहने वाले लोगों से मुख्यमंत्री ने एक घंटे से ज्यादा समय तक चर्चा की और मांगों को मौके पर ही मंजूरी दी। शिविर में शिक्षकों की समस्या को ध्यान में रखते हुए जगरगुंडा के बारहवीं पास १५ छात्रों को शिक्षाकर्मी वर्ग ३ के पद पर नियुक्ति देने की घोषणा की। विद्युत, स्वास्थ्य एवं हैंडपंप की समस्या के समाधान हेतु पांच महिला एवं पांच पुरुषों को प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया।

उन्होंने शिविर में सिलाई मशीन प्रशिक्षण हेतु २क् मशीनें भी देने का वादा किया। जगरगुंडा के थानेदार शहीद हेमंत मंडावी के नाम से 10 लाख रुपए की लागत पर सामुदायिक भवन जगरगुंडा में बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की। मुख्यमंत्री ने शाम को उसूर के अलावा भानुप्रतापपुर का भी दौरा किया।





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