नई दिल्ली
भारतीय हॉकी टीम के महासचिव ज्योति कुमारन पर एक टीवी चैनल ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक हॉकी खिलाड़ी को देश की राष्ट्रीय हॉकी टीम में शामिल करने के लिए रिश्वत ली है।
क्या था स्टिंग ऑपरेशन में
भारतीय हॉकी फैडरेशन के महासचिव ज्योतिकुमारन को बेंगलूर कैंप में शामिल एक खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम में खेलने का मौका देने के लिए छह लाख रुपए की मांग करते दिखाया गया। चैनल ने अपने ऑपरेशन में ज्योतिकुमारन को 2 लाख रुपए लेते और बाकी के 4 लाख रुपयों की मांग करते हुए दिखाया है। चैनल पर कुमारन को रुपए लेने के बाद इस बात का भी आश्वासन देते हुए दिखाया गया कि इस खिलाड़ी को 8 मई से मलेशिया में होने जा रही अजलान शॉह हॉकी टूर्नामैंट में भारतीय हॉकी टीम में जरूर शामिल किया जाएगा।
हालांकि कुमारन ने यह भी कहा कि उन्होंने इस खिलाड़ी को किसी बड़े टूर्नामैंट में खेलते हुए नहीं देखा है, पर वह इसे एडजस्ट करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने इस सिफारिशी खिलाड़ी के जूनियर टीम में खेलने का तो पक्का वादा किया, पर सीनियर टीम में स्टैंड बाई के रूप में शामिल करने की बात कही।
पुष्टि होना अभी बाकी
आज के इस खुलासे के बाद इस बात की पुष्टि होना अभी बाकी है कि क्या वाकई देश का हॉकी फैडरेशन इतना भ्रष्ट हो चुका है। वैसे चैनलों द्वारा किए गए स्टिंग की विश्वसनीयता पर भी समय-समय पर प्रश्नचिन्ह लगते रहे हैं।
भारतीय हॉकी के इतिहास में इससे ज्यादा शर्मनाक बात नहीं हो सकती। यह सरासर हॉकी के भविष्य से खिलवाड़ है और देश से गद्दारी है।
परगट सिंह, पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान
राष्ट्रीय खेल की यह दशा शायद फैडरेशन के ऐसे कुकृत्यों की वजह से हुई है। अगर यह बात प्रमाणित होती है तो दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
हरप्रीत सिंह, ओलंपियन
राष्ट्रीय खेल के साथ अगर इस तरह के व्यवहार के बाद भी अगर सरकार कुछ नहीं करती तो हॉकी का अंत निश्चित है।
बलजीत ढिल्लों, ओलंपियन
अगर पहले पता होता कि देश के लिए पैसे दे के खेला जा सकता है तो हम भी इतने पैसों का इंतजाम कर लेते। ज्योति के सरेराह सजा दी जानी चाहिए।
गगनअजीत सिंह, ओलंपियन