HomeNewsChhattisgarhBilaspur Bilaspur

13 गांव: नक्शे में हैं, पर नक्शा नहीं!

बिलासपुर. प्रशासन के पास जिले के 13 गांवों का नक्शा ही नहीं है। इन्हें बनाने की कवायद पिछले डेढ़ साल से चल रही है, लेकिन सफलता अब तक नहीं मिल सकी। नक्शा बनने के बाद यहां के ग्रामीणों को नए सिरे से भू-अभिलेख का वितरण किया जाना है।

जिले में चार विकासखंडों के 12 गांव ऐसे हैं, जिनके नक्शे जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं, वहीं बिल्हा ब्लाक का ग्राम दगौरी नक्शाविहीन है। जिन गांवों का नक्शा बनाया जा रहा है, उनमें मस्तूरी ब्लाक के रिस्दा, परसदा (बेद), कटहा, पेंड्रा ब्लाक के पेंड्रा, मुरमुर, सोनबचरवार, जमड़ीखुर्द, गौरेला ब्लाक के गिरवर, गोरखपुर, लमना और रतनपुर ब्लाक के ग्राम कर्रा व नगागांव शामिल है। पेंड्रा ब्लाक मुख्यालय का नक्शा भी उपलब्ध नहीं है।

शासन ने इन गांवों का नक्शा व जमीन संबंधी रिकार्ड फिर से तैयार करने के निर्देश दिए थे। इस पर प्रशासन ने डेढ़ साल पहले प्रक्रिया शुरू की। 6 दिसंबर 2006 को इस कार्य के लिए दर्जन भर राजस्व निरीक्षकों (आरआई) की नियुक्ति की गई। शासन की मंशा थी कि रिकार्ड जल्द अपडेट किया जा सके, लेकिन उच्चधिकारियों की उदासीनता के कारण यह काम अब तक लटका हुआ है।

12 राजस्व निरीक्षकों में से 8 की ड्यूटी करीब एक साल से अन्य तहसीलों में लगा दी है। केवल चार गांव रिस्दा, सोनबचरवार, कर्रा व लमना में नक्शा बनाने का काम चल रहा है। हवाई सर्वे से बनाए गए नक्शे के आधार पर इन गांवों में जाकर भौतिक सत्यापन किया जाना है। रकबा, खसरा का मिलान कर नया नक्शा बनाया जाएगा। नक्शा बनने पर ग्रामीणों के दावा-आपत्तियों की सुनवाई भी की जाएगी। इसके बाद रिकार्ड अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

नक्शा तैयार होने के पश्चात ग्रामीणों को खसरा, बी-वन, भू-अधिकार ऋण पुस्तिका व अन्य दस्तावेज नए सिरे से वितरित किए जाएंगे। विभागीय कवायद ठंडी पड़ने के बाद माना जा रहा है कि नक्शा बनाने के काम में अभी और कुछ वर्ष लग सकते हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: