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‘सुराज’ में निकला पीडीएस का जिन्न

बिलासपुर. रमन सरकार ने तीन रुपए किलो में चावल बंटवाकर गरीबों को सुविधा दी है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा समस्याएं सामने आ रही हैं। ग्राम सुराज अभियान के पहले दिन सुराज दलों को सर्वाधिक शिकायतें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के संबंध में मिली। कहीं राशन कार्ड न बनने, तो कहीं चावल की गुणवत्ता न होने की शिकायत ग्रामीणों ने की। इसी तरह सरपंचों के खिलाफ भी ग्रामीणों ने भड़ास निकाली।

ग्राम सुराज अभियान का पहला चरण आज से प्रारंभ हुआ। 208 सुराज दलों के सदस्य इतने ही गांवों तक पहुंचे और ग्रामसभाएं लेकर ग्रामीणों की समस्याओं की जानकारी ली। अधिकांश गांवों में पीडीएस को लेकर दलों को आवेदन मिले। कई गांवों में ग्रामीणों ने बताया कि पात्र होने के बावजूद उनका राशन कार्ड नहीं बनाया गया है, वहीं अपात्रों को कार्ड जारी कर दिया गया है।

इसके अलावा पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा संबंधी समस्याएं देखने को मिलीं। अभियान में दलों को समस्याओं से अधिक मांगों की अर्जियां मिलीं। जमीन बंटवारे व बेजा-कब्जा को लेकर भी कुछ शिकायतें प्राप्त हुईं। इस बार हर तरह की समस्याओं के लिए अलग-अलग आवेदन लिए जा रहे हैं, जिन्हें विकासखंडवार विभागों को भेजकर निराकृत किया जा सके। शादी-ब्याह के मौसम के कारण सभाओं में ग्रामीणों की भीड़ अपेक्षाकृत कम ही रही।

सोमवार को बड़ी संख्या में शादियां हुईं। ग्रामीण शादी-ब्याह में व्यस्त रहे, लिहाजा पहले दिन दलों को कम आवेदन मिले। एडिशनल कलेक्टर धनंजय देवांगन सुराज अभियान की मानिटरिंग के लिए बिल्हा, कोटा क्षेत्र के ग्राम नवगंवा, बेलतरा, कर्रा व लछनपुर पहुंचे।

उन्होंने बताया कि सुराज दलों द्वारा हर गांव में ग्रामसभाएं ली जा रही हैं, साथ ही प्रगति पुस्तिका के अनुसार वहां पूर्ण हो चुके व संचालित विकास कार्यो का भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है। अभियान का पहला चरण 24 अप्रैल को समाप्त होगा। इसके बाद 25 अप्रैल को सभी शिकायतें कंप्यूटर में दर्ज की जाएंगी। दूसरा चरण 26 अप्रैल से प्रारंभ होगा, जो 30 अप्रैल तक चलेगा।

गर्मी से हालत खराब: सुराज दलों में शामिल ग्राम प्रभारी, दल प्रभारी व सहायक दल प्रभारी सोमवार को सुबह निर्धारित ग्रामों तक अपने साधनों से पहुंच गए थे। कुछ घंटों बाद दोपहर में सूरज ने अपना तेवर दिखाना शुरू किया तो दलों के सदस्यों के पसीने छूटने लगे। ये दल रात गांवों में ही बिताएंगे। वे रात लौटकर शहर न आ जाएं, इसके लिए खासतौर पर मानिटरिंग के निर्देश जोनल अफसरों को दिए गए हैं।





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