न्यूयॉर्क. बचपन में शारीरिक गतिविधियों का अभाव मधुमेह, उच्च रक्तचाप और रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर बढ़ने और मोटापे का कारण बन सकता है। इन सभी सम्मिलित लक्षणों को चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ‘मेटाबोलिक सिंड्रोम’ की संज्ञा दी जाती है।
एक नए शोध से यह पता चला है कि बचपन में व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों के अभाव से प्रौढ़ावस्था में दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ सकता है।
इसके कारण उम्र बढ़ने पर हृदय संबंधी समस्याएं पैदा होने की संभावना काफी अधिक हो जाती है। दरअसल ‘मेटाबोलिक सिंड्रोम’ की संभावना का पता लगाने के लिए सात से 10 वर्ष के बीच बच्चों और 14 से 17 वर्ष के बीच के किशोरों का अध्ययन किया गया।
शारीरिक गतिविधियों में भाग नहीं लेने वाले करीब आधे बच्चों में सात वर्ष की उम्र तक ‘मेटाबोलिक सिंड्रोम’ का कोई एक लक्षण देखने को मिला। करीब पांच प्रतिशत बच्चों में ‘मेटाबोलिक सिंड्रोम’ के सभी लक्षण उत्पन्न हो गए थे। शरीरिक गतिविधियों में शामिल बच्चों में ‘मेटाबोलिक सिंड्रोम’ के स्तर से यह करीब छह गुना अधिक है। अध्ययन के निष्कर्ष ‘डायनैमिक मेडिसीन’ पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं।
इसी शोध पर उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय के रॉबर्ट मक्मुरी ने कहा कि, “आज के बच्चे बहुत आरामतलबी का जीवन जीते हैं और मोटापे का शिकार बन रहे हैं”।