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सवालों के साथ शीतल ने शहर छोड़ा

भोपाल. शीतल ठाकुर गोली कांड के रहस्य का पर्दा अब तक नहीं हटा है। वह अपने शरीर के भीतर गोली लिए ही अचानक शहर से बाहर चली गई है। पुलिस जिस हथियार से उस पर गोली चलना बता रही है, वह संभव नजर नहीं आता। हां, यह संभावना जरूर नजर आ रही है कि इस कांड में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। जिन्हें फिलहाल शीतल से खतरा है और वे भी शीतल के लिए खतरा बन सकते हैं।

भास्कर की पड़ताल बताती है कि शीतल का मामला हाई प्रोफाइल लोगों से जुड़ा है। जिसमें एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, भेल के एक पूर्व अफसर और एक र्न्िसग होम के संचालक की भूमिका संदिग्ध है। पुलिस का कोई भी अधिकारी इस बारे में मुंह खोलने को तैयार नहीं है। सूत्र बताते हैं कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के दबाव के कारण भी पुलिस इस जांच को आगे नहीं बढ़ा रही है। वह इस मामले को दबाकर रफादफा करना चाहती है। हाई प्रोफाइल लोगों के शामिल होने के कारण भी शीतल को अपनी जान का खतरा है और यही वजह है कि वह जानने के बाद भी आरोपियों के नाम का खुलासा करने की बजाय अचानक अपने घर सिवनी मालवा चली गई है।

कौन सा था हथियार

आर्म्स और फारेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट में शीतल पर देशी रिवाल्वर और पिस्टल से गोली चलना बताया है। विशेषज्ञ गोली के बोर का भी खुलासा कर चुके हैं, लेकिन पुलिस इसका खुलासा नहीं कर रही है। पुलिस अफसरों के कथन मामले को और उलझा रहे हैं वे 315 बोर की गोली की बात कर रहे हैं जबकि इस गोली के लगने के बाद बचने की संभावना क्षीण होती है। सूत्रों का कहना है कि गोली किस हथियार से चली, इसका खुलासा शायद इसलिए नहीं किया जा रहा है क्योंकि संभवत: ऐसे हथियार कुछ चुनिंदा लोगों के पास ही हैं।

शीतल की गोली क्यों नहीं निकाली?

शीतल की पसली में फंसी गोली नहीं निकलना भी संदेह पैदा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार इसकी वजह यह हो सकती है कि गोली निकलने से वास्तविक पिस्टल का पता लगाया जा सकता है। इस तर्क पर भी मतभेद हैं कि गोली निकालने से शीतल की जान को खतरा है।

पूछताछ

पुलिस इससे पहले भेल के रिटायर्ड अधिकारी सहित कुछ अन्य लोगों से शीतल के मेल-जोल और फोन पर लंबी बातचीत के संबंध में चर्चा कर चुकी है। पुलिस की जानकारी में यह बात भी आई है कि डा. देवानी ने शीतल को जहां पेइंग गेस्ट बनवाया था, वहां कई दिनों तक वह पहुंचती ही नहीं थी।

विशेषज्ञों और पुलिस की मानें तो गोली 315 बोर की रिवाल्वर या पिस्टल से चली है, जबकि 315 बोर की रिवाल्वर नहीं हो सकी थी। रिवाल्वर में छह राउंड लगते हैं और पिस्टल में कारतूसों की मैगजीन लगती है। 315 बोर का कारतूस पुलिस की 303 राइफल के बराबर होता है जो रिवाल्वर और पिस्टल की मैगजीन में नहीं आ सकता है। यही वजह है कि पुलिस अधिकारी, आर्म्स और फोरेंसिक विशेषज्ञ केवल यहीं खुलासा कर रहे हैं कि गोली रिवाल्वर या पिस्टल से चली है। यदि मामले का खुलासा पुलिस करती भी है तो उन्हें बाद में दिक्कत नहीं आए।





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