इंदौर. एसजीएसआईटीएस को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलवाने के लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री नागेंद्र सिंह ने सोमवार को भोपाल में बैठक बुलवाई थी। शुरुआत में ही दो मामलों को लेकर माहौल गरमा गया। पहले संस्थान के नियमित काम-काज के संचालन के लिए बनी उपसमिति का मामला उठा। दूसरा कॉलेज द्वारा शासी निकाय की अनुमति के बिना नियुक्तियों का विज्ञापन जारी करने का। संस्थान की ओर से डायरेक्टर डॉ. स्वराजमल हूमड़ के अलावा उपसमिति के उपाध्यक्ष जस्टिस पी.डी. मूल्ये, एक रीडर, एक प्रोफेसर और लेक्चरर शामिल हुए। तकनीकी शिक्षा मंत्रालय की तरफ से मंत्री के अलावा प्रमुख सचिव, डायरेक्टर टेक्निकल एजुकेशन मौजूद थे।
डीटीई को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी
संचालन के लिए बनी उपसमिति की कार्यप्रणाली पर मंत्री ने जमकर आपत्ति ली। इस समिति के अध्यक्ष तकनीकी शिक्षा मंत्री नागेंद्र सिंह हैं। श्री सिंह ने कहा २क्क्६ से मंत्री की अनुमति के बिना उपाध्यक्ष ही इसका काम कर रहे थे। सारे निर्णय उपाध्यक्ष स्तर पर ही हो रहे थे। नियमानुसार निर्णयों में कही भी अध्यक्ष से अनुमति नहीं ली गई। इसे मैं अनुचित मानता हूं। इसकी वैधानिक स्थिति संस्थान से एक माह के अंदर बताने का कहा है। तब तक उपाध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी डायरेक्टर टेक्नीकल एजुकेशन अरुण नाहर को सौंप दी गई।
नियुक्तियां अमान्य
संस्थान द्वारा कुछ माह पहले विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। विज्ञापन जारी करने से पहले तकनीकी शिक्षा मंत्रालय को सूचना तक नहीं दी गई। न ही विभाग से इसके लिए मंजूरी दी गई थी। डायरेक्टर टेक्निकल एजुकेशन अरुण नाहर ने बताया इसलिए इन सारी नियुक्तियों को विभाग ने अमान्य कर दिया है। नियुक्तियों के संबंध में संस्थान से भी पूछा गया है की किससे पूछकर विज्ञापन जारी किया।
मेरी जानकारी में नहीं
बैठक में उपसमिति के उपाध्यक्ष पद को लेकर चर्चा हुई थी। परंपरा के तहत मैं समिति का उपाध्यक्ष हूं। मेरी जानकारी में नहीं लाया गया कि यह जिम्मेदारी किसी और को सौंप दी गई है।
जस्टिस पी.डी. मूल्ये, सेवानिवृत्त