इंदौर/मालवा-निमाड़ अंचल.
इंदौर में मंगलवार को अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक 41 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि पिछले वर्ष 22 अप्रैल को पारा 38.7 डिग्री सेल्सियस पर ही था। दिनभर 10 से 20 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिमी गर्म हवाएं चलती रहीं। लू के थपेड़ों से दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
उधर बड़वानी में मंगलवार को पारा 2.4 डिग्री चढ़ कर 44.9 डिग्री तक पहुंच गया। न्यूनतम तापमान भी 28 डिग्री रहा। पिछले साल इसी दिन बड़वानी में अधिकतम 42 व न्यूनतम 24 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था। 18 अप्रैल से पारा 42 डिग्री बना हुआ है। स्कूल संचालक पुष्पा खंडेलवाल ने बताया सोमवार को पारा 42.5 व 26 डिग्री दर्ज किया गया था। न्यूनतम तापमान बढ़ने से रातभर गर्म हवाएं चल रही हैं। लू का प्रकोप बढ़ने से लोग पसीने से तरबतर होते रहे। बड़वानी में 27 साल पहले 1 जून 1980 को अधिकतम तापमान 49.5 डिग्री रहा। न्यूनतम तापमान 30 डिग्री दर्ज किया गया था।
धरती से पानी गायब!
धार. जो नलकूप पहले दिनभर चलते थे वे अब मुश्किल से तीन घंटे भी नहीं चल पा रहे हैं। सरदारपुर क्षेत्र में ७00 फीट पर भी पानी नहीं मिल पा रहा है। धरमपुरी में दो माह के अंतराल में ४५ से ५क् फीट तक पानी नीचे जा चुका है।
रिकार्ड तोड़ सकती है गर्मी
गर्मी के मौजूदा तेवर इस बार पिछले रिकार्ड टूटने का संकेत दे रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है यदि कोई पश्चिमी विक्षोभ (ऊपरी हवा में बनने वाला चक्रवात) नहीं आया तो गर्म हवाएं मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। विक्षोभ से तापमान कम हो जाता है। मौसम विभाग के अनुसार गत वर्ष पूरे मौसम में अधिकतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस मई में रहा था। जिस तरह से पारा उछल रहा है अंदेशा है जल्द ही यह आंकड़ा पार हो जाएगा।
यदि कोई पश्चिमी विक्षोभ आया तो गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। मालवा के मौसम में आ रहे इस बदलाव के लिए विशेषज्ञ प्रदूषण, वनों की कटाई और बढ़ते शहरीकरण को जिम्मेदार मान रहे हैं।
झाबुआ में 37 हजार को लगी लू
झाबुआ जिले में पारा लगातार बढ़ रहा है। गर्मी के चलते अब तक लू लगने व गर्मीजनित बीमारियों से जिले में 37 हजार लोग प्रभावित हो चुके हैं। सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी चिकित्सकों के यहां भी मरीजों की लंबी लाइनें लग रही हैं। धार में गर्मी के कारण करीब तीस हजार से अधिक लोग अप्रैल महीने में अब तक बीमार पड़े हैं। इनमें सबसे अधिक वायरल फीवर से पीड़ित हैं। अकेले जिला अस्पताल में रोजाना २५क् से अधिक नए मरीज आ रहे हैं। जबकि ओपीडी ७क्क् से अधिक हो रही है।