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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. माध्यमिक शिक्षा मंडल(माशिमं) द्वारा आयोजित 10वीं-12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने का काम अभी भी चल रहा है। तयशुदा टाइमटेबल के अनुसार चार दिन पहले तक यह काम पूरा हो जाना था। 20 अप्रैल तक उत्तर पुस्तिकाएं और तमाम गोपनीय सामग्री मुख्यालय के स्ट्रांग रुम में लाक करना तय किया गया था। हालात इससे उलट हैं।
माशिमं के जानकार सूत्रों ने बताया कि जांजगीर-चांपा और अंबिकापुर जिले में सबसे ज्यादा उत्तर पुस्तिकाएं बाकी हैं। बिलासपुर और जगदलपुर जिले में भी उत्तर पुस्तिका जांचने का काम पूरा नहीं हो सका है। रायपुर जिला तक पिछड़ने से अछूता नहीं है। माशिमं ने तीन दिन पहले सभी जिलों के मूल्यांकन केंद्र प्रभारियों से रिपोर्ट मंगवाई थी। केंद्रों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 25 फीसदी मूल्यांकनकर्ता ही गायब हैं।
मूल्यांकन के लिए ड्यूटी तय होने के बाद किसी ने अपने बेटे तो किसी ने बिटिया की शादी के नाम पर छुट्टी ले रखी हे। बीमारी का आवेदन पत्र भेजने वाले शिक्षक भी दर्जनों में हैं। जितने मूल्यांकनकर्ता छुट्टी पर गए हैं, उतने शिक्षकों की जिम्मेदारी दूसरे शिक्षकों को पूरी करनी पड़ रही है।
रिपोर्ट के आधार पर माशिमं के अफसरों ने हालात की समीक्षा की और उम्मीद जताई है कि अभी तीन-चार दिन और उत्तर पुस्तिकाएं जांचने का काम चलेगा। उसके बाद नतीजे घोषित करने की तैयारी की जाएगी। मूल्यांकन में पिछड़ने के बावजूद अफसरों ने उम्मीद जताई है कि 25 से 28 मई के मध्य हाई व हायर सेकेंडरी दोनों कक्षाओं के नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर अभी से तैयारी की जा रही है। अफसरों का दावा है कि गोपनीय सामग्री मुख्यालय पहुंचने के बाद नतीजे बनवाने में विलंब नहीं होगा।
नतीजों तक का सफर
हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के लिए मूल्यांकनकर्ता और एक सहायक की ड्यूटी लगाई गई है। उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के बाद मूल्यांकनकर्ता अंकों को जोड़कर उत्तर पुस्तिका के सबसे पहले पेज पर अंकित करते हैं। उसके बाद उनके सहायक अंकों को दोबारा जोड़कर टोटल चेक करते हैं। अंकों का जोड़ सही होने पर उत्तरपुस्तिका को गणक के पास भेजा जाता है।
मूल्यांकन केंद्र के ही एक हिस्से में गणक
उत्तरपुस्तिका के अंकों को जोड़कर गोपनीय रजिस्टर में पूरा ब्योरा दर्ज करते हैं। उसमें उम्मीदवार का रोल नंबर, सेंटर नंबर और प्रत्येक विषय के प्राप्तांक को लिखा जाता है। ऐसे दो रजिस्टर बनाए जाते हैं। इसी रजिस्टर को अंकसूची बनवाने के लिए गोपनीय स्थान पर भेजा जाता है। अफसरों के अनुसार दो रजिस्टरों में इंट्री करने के कारण अंकसूची बनते समय भी अंकों में हेरफेर की गुंजाइश नहीं रह जाएगी।