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81 लाख का गबन

जयपुर. j केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 81 लाख रुपए के गबन के आरोप में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉपरेरेशन के तीन अधिकारियों के निवास पर मंगलवार को छापे मारे। इनमें दो आरोपियों के निवास जयपुर में, जबकि एक का अहमदाबाद में है। छापों में लाखों रुपए का निवेश, जेवर व नकदी मिली है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली सीबीआई विंग ने तीन दिन पहले जयपुर में आईओसी के क्षेत्रीय कार्यालय में फाइनेंस मैनेजर अनिल कुमार जोशी व दो डिप्टी फाइनेंस मैनेजरों प्रशांत सैनी व जे.एस. पंवार के खिलाफ 81 लाख रुपए गबन करने का मामला दर्ज किया था।

अधिकारियों ने कंपनी में आमंत्रित निविदाओं में बोली लगाने वालों की सिक्योरिटी राशि में घपला किया। ऐसे हजारों निविदादाताओं ने राशि कंपनी से वापस नहीं ली है। यह राशि करोड़ों में पहुंच चुकी है। इसको आईओसी ने डेड एकाउंट में डाल रखा है। जोशी, सैनी व पंवार ने षडयंत्र रचकर 2001 में तीन फर्जी फर्र्मो के बैंक खाते सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ व अन्य जगह खुलवाए। लक्ष्मणगढ़ की तीन फर्र्मो के नाम पेरिस गिफ्ट हाउस, भाविक बल्क कैरियर व श्रीगणोश बल्क कैरियर थे। इन तीनों फर्र्मो के मालिक जोशी की पत्नी, सास, भाई, ससुर व साली थे।

दिल्ली सीबीआई के उपअधीक्षक सतीश डिंडयाल के नेतृत्व में एक दल मंगलवार सुबह यहां आया और जयपुर विंग की सहायता से जोशी के चित्रकूट और सैनी के ैवैशाली नगर मकानों पर छापे मारे। इसके अलावा सीबीआई की एक टीम ने पंवार के अहमदाबाद निवास पर छापा मारा। सीबीआई ने अभी किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है।

छापे में क्या-क्या मिला

जोशी के घर से 25 तोला सोने के जेवर, दो प्लाटों के कागजात, बैंक खातों के अलावा एक बैंक लॉकर का पता चला है। खातों व बैंक लॉकर की जांच की जा रही है। सैनी के निवास पर मिले सामान की जांच की चल रही है। उसके बैंक लॉकर का भी पता चला है।

कब से कब तक घोटाला

तीनों आरोपियों ने 2001 मार्च से 2007 जुलाई तक घोटाला किया। इस दौरान परिजनों के नाम से खोली गई फर्जी फर्र्मो से बिल प्राप्तकर वाउचर से पेमेंट किया गया। जांच में सामने आया कि एक ही बिल के दो-दो बार वाउचर बनाकर पेमेंट उठाया गया।

एक ने नौकरी छोड़ी, एक निलंबित

यह घपला सामने आने के बाद इंडियन ऑयल कॉपरेरेशन ने गत नवंबर में जोशी को निलंबित कर दिया था, जबकि सैनी ने नौकरी छोड़ दी थी। वर्तमान में वह गुड़गांव में रहता है। पंवार का तबादला अहमदाबाद कर दिया गया था।

71.65 लाख रु. जमा कराए

आईओसी की जांच शुरू होने के बाद जोशी, सैनी व पंवार ने अपनी गलती मानते हुए सीबीआई द्वारा मामला दर्ज होने से पहले विभाग में 71 लाख 65 हजार रुपए जमा करा दिए थे।





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