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ज्योतिकुमारन गिल की नजर में बेकसूर!

चंडीगढ़.इंडियन हॉकी फेडरेशन (आईएचएफ) के अध्यक्ष के.पी.एस गिल इतना सब होने के बाद भी आईएचएफ सचिव ज्योतिकुमारन को बेकसूर मानते हैं। गिल का कहना है कि ज्योतिकुमारन को पिछले साल सिलेक्शन कमेटी में शामिल नहीं किया गया था। वे किसी खिलाड़ी को टीम में शामिल करने या नहीं करने का फैसला कैसे ले सकता हैं। पैसा लेने की बात बिल्कुल गलत है। गिल ने कहा कि स्टिंग ऑपरेशन करने वाले जो दिखा रहे हैं वह सब गलत है। ज्योतिकुमारन ने बताया है कि स्टिंग वाले चंडीगढ़ में अजलान शाह जैसे बड़ा टूर्नामेंट आयोजित करवाना चाहते थे।

इसीसिलसिले में वे मुझे एडवांस दे रहे थे। उसी पैसे को गलत ढंग से लेते हुए दिखाया गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या किसी टूर्नामेंट के आयोजन से पहले आईएचएफ आयोजकों से एडवांस लेती है, गिल ने कहा ‘ऐसा नहीं होता’। क्या किसी खिलाड़ी ने उनसे टीम में धांधली होने की शिकायत की, इस पर उन्होंने कठोर लहजे में कहा कि ऐसा कभी हुआ ही नहीं। जिस खिलाड़ी का हवाला देकर यह स्टिंग किया गया है वह खिलाड़ी तो पहले ही एक अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल चुका है। स्टिंग करने की जरूरत ही नहीं बनती।

गिल के पास भी गए थे:

गिल ने माना कि जिस दिन यह स्टिंग किया गया उसी दिन स्टिंग ऑपरेशन करने वाले दोनों जर्नलिस्ट उससे भी मिले थे। गिल के मुताबिक शायद आज से 20-25 दिन पहले की बात है। दो लोग मेरे दिल्ली वाले घर पर आए थे। खुद को सनशाइन बिल्डिंग कंपनी के अधिकारी बताते हुए उन्होंने चंडीगढ़ में हॉकी का अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कराने की बात कही थी। मैंने उन से कहा कि वे अपना प्रस्ताव आईएचएफ की मेल पर डालें। आईएचएफ अधिकारी उस मेल के जरिये बात करेंगे। बाद में आईएचएफ की साइट पर कोई मेल नहीं आई। ज्योतिकुमारन के इस्तीफे के बाद भी गिल कहते हैं कि आईएचएफ के एग्जिक्यूटिव मेंबर्स से बात करके ही मैं किसी नतीजे पर पहुंचूंगा।

खिलाड़ी-अधिकारी दोनों शिकार

चंडीगढ़, ज्योतिकुमारन की असलियत सामने आने के बाद न केवल खिलाड़ी बल्कि हॉकी कोच और कई स्टेट हॉकी एसोसिएशन से जुड़े अधिकारी भी उनके खिलाफ खुलकर सामने आने लगे हैं।

2001 में वल्र्ड चैंपियन रही जूनियर इंडियन हॉकी टीम के कोच एन.एस. सोढी ने बताया कि उस वर्ष जब टीम का चयन हो रहा था तो ज्योतिकुमारन ने ऐन मौके पर महाराष्ट्र के खिलाड़ी विरेंन रसकिन्हा को हटाकर चेन्नई के खिलाड़ी को टीम में डालने पर जोर दिया था, उस समय टीम के साथ मैं और राजेंद्र सिंह जुड़े थे हम दोनों हॉकी खिलाड़ी होने के नाते जानते थे कि किसे रखना चाहिए और किसे नहीं।

चंडीगढ़ के खिलाड़ी को निकाला

इसी तरह 2004 में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले 4 देशों के हॉकी टूर्नामेंट में भारत सरकार द्वारा अप्रूव्ड खिलाड़ियों की लिस्ट से चंडीगढ़ के एक खिलाड़ी का नाम अंतिम समय में काट कर दिल्ली के एक खिलाड़ी को टीम में लिया गया था।

बढ़िया परफॉर्म्ेस फिर भी बाहर

चंडीगढ़ हॉकी एसोसिएशन के सचिव वाई.पी. वोहरा अप्रैल 2007 में बेंगलूर में अजलान शाह टूर्नामेंट के लिए इंडिया टीम के चयन ट्रायल्स के समय मौजूद थे। उन्होंने बताया कि उस समय ट्रायल्स के लिए आए खिलाड़ियों में चंडीगढ़ के दीपक ठाकुर और पंजाब के गगनअजीत सिंह को बेहतरीन परफार्म्ेस के बावजूद टीम में शामिल नहीं किया गया।

कोई तर्क नहीं दिया जाता: ठाकुर

इंडिया की जूनियर वल्र्ड कप हॉकी विजेता टीम के सदस्य और कई बार सीनियर हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके चंडीगढ़ के दीपक ठाकुर ने कहा कि जब भी उसने खुद को टीम में शामिल न किए जाने पर चयनकर्ताओं से पूछा, उसे कभी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

हॉकी को डालमिया चाहिए: राजपाल

इंडियन सीनियर हॉकी टीम के खिलाड़ी चंडीगढ़ के राजपाल सिंह का मानना है कि ज्योतिकुमारन के बाद अब हॉकी की हालत सुधरने की उम्मीद है। राजपाल का मानना है कि क्रिकेट की तरह हॉकी को भी डालमिया जैसे प्रोडक्ट सेल्जमैन की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में इंडियन हॉकी टीम के कप्तान रहे राजपाल ने बताया कि टीम के चयन में कप्तान का कोई रोल नहीं होता है उसका इस्तेमाल तो बस सिक्का उछालने के लिए होता है।





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