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Personal Finance Personal Finance नई दिल्ली. देश में कमोडिटी बाजार की नियामक संस्था फारवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) चाहती है कि सरकार वायदा बाजार पर प्रस्तावित कमोडिटी ट्रांजक्शन टैक्स यानी (सीटीटी) को वापस ले ले।
एफएमसी के चेयरमैन बी.सी. खटुआ का कहना है कि सरकार का यह कदम कारोबारियों व सटोरियों को विदेशी वायदा बाजार में निवेश के लिए न सिर्फ प्रोत्साहित करेगा बल्कि कारोबार में पैकिंग यानी अवैध तरीकों इस्तेमाल को बढ़ावा देगा।
खटुआ के अनुसार घरेलू वायदा बाजार मे कारोबार पहले से ही महंगा है और अगर सरकार का यह प्रस्ताव अमल में आ जाता है तो कारोबार 800 गुना महंगा हो जाएगा। खटुआ मानते हैं कि बिना किसी उचित नियामक ढांचे के ऐसे किसी प्रस्ताव को लागू करना वायदा कारोबार के हित में नहीं होगा।
इससे पूर्व सरकार ने वर्ष 2008-09 के आम बजट में एक अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष के दौरान कमोडिटी ट्रांजक्शन टैक्स को व्यवहार में लाने का प्रावधान किया था। इस प्रस्ताव के तहत निपटान सौदों पर बिकावाल को 0.017 फीसदी और लेवाल को 0.125 फीसदी का दर से कर अदा करने की व्यवस्था की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रस्ताव के क्रियान्वित होने की स्थिति में वायदा कारोबार करने वाले किसानों को भी सीटीटी को वहन करना होगा। अभी किसानों को वायदा कारोबार पर कर नहीं चुकाना पड़ रहा है।