नई दिल्ली.
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग (एनकेसी) ने आगाह किया है कि आईआईटी और आईआईएम जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों के कामकाज में दखल नहीं दिया जाना चाहिए, अन्यथा इससे ‘दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियां’ पैदा हो सकती हैं।
आयोग के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने हाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में आगाह करते हुए कहा, ‘संस्थानों के कामकाज में मंत्रालयों के सीधे हस्तक्षेप से दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियां निर्मित हो सकती हैं।’
अपने पत्र में पित्रोदा ने कहा कि संस्थानों की स्वायत्तता सही मायनों में सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि उनकी प्रशासनिक प्रणाली को मंत्रालयों केरोजमर्रा के कामकाज से अलग रखा जाए।’
पित्रोदा ने पत्र में लिखा कि नए आईआईटी, आईआईएम, आईआईएसईआर, एम्स और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के डायरेक्टरों व वाइस चांसलरों की नियुक्ति एक ऐसी ‘सर्च कमेटी’ द्वारा की जाना चाहिए, जो एक स्वतंत्र व्यक्ति की अध्यक्षता में उच्चकोटि के फैसले लेने में सक्षम हो।
सरकार ने ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत आठ नए आईआईटी, सात आईआईएम और 30 नए केंद्रीय विश्वविद्यालय व विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का फैसला किया है। पित्रोदा ने कहा कि उच्च शिक्षा का क्षेत्र विस्तृत करने के लिए सरकार ने हाल में जो उपाय किए हैं, वे संभवत: भारत को आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उठाए गए सबसे महत्वपूर्ण कदमों में शामिल हैं।