संपादकीय. भारतीय हॉकी इन दिनों कामकाज में कथित गड़बड़ी, उच्च अधिकारियों की कथित तानाशाही, टीमों के खराब प्रदर्शन तथा खिलाड़ियों के चयन में रिश्वतखोरी के लिए चर्चित हो रही है। भारतीय हॉकी के इतिहास में पहली बार किसी पदाधिकारी पर चयन के एवज में कथित तौर पर घूस लिए जाने का स्टिंग ऑपरेशन हुआ है। इस घटना के बाद फेडरेशन के अध्यक्ष केपीएस गिल को जवाब देना मुश्किल हो रहा है।
केंद्रीय खेल राज्य मंत्री, भारतीय ओलिंपिक संघ, पूर्व अंतरराष्ट्रीय सितारे ये सभी गिल को घेरने की पूरी-पूरी कोशिश कर ही रहे हैं कि खबर मिली कि फेडरेशन महासचिव ज्योतिकुमारन प्रकरण पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ भी नाराज है तथा उसने भारतीय हॉकी महासंघ को इस मामले में उचित कार्रवाई का निर्देश दिया है। इसका तात्पर्य यह हुआ कि विदेशों में भी उक्त कथित करतूत की खूब चर्चा हो रही है। हालांकि ज्योतिकुमारन इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन केपीएस गिल उन्हें निदरेष बताकर आग में घी डालने का काम कर रहे थे।
अंतरराष्ट्रीय महासंघ के विरोध के बाद अब गिल कहने लगे हैं कि ‘ऑपरेशन चक दे’ की तीन सदस्यीय समिति जांच करेगी। वैसे गिल अपरोक्ष रूप से ज्योतिकुमारन का पक्ष ले रहे थे जिससे खेल जगत उनके खिलाफ होता जा रहा था। खेलमंत्री ने तो उनसे इस्तीफा तक देने की मांग कर ली है। गिल भले सफाई दें, लेकिन भारतीय हॉकी महासंघ के कामकाज में पारदर्शिता नहीं होने की चर्चा पिछले डेढ़ दशक से हो रही है।
गिल पर अक्सर चयन में हस्तक्षेप, योग्य प्रशिक्षकों की उपेक्षा तथा सीनियर खिलाड़ियों को उचित सम्मान न दिए जाने का आरोप लगता रहा है। अब जबकि अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ की गिद्ध-दृष्टि भारतीय हॉकी महासंघ पर पड़ी है, तो अब शायद मनमानी पर अंकुश लग जाए तथा कामकाज में पारदर्शिता आ जाए। वैसे अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ इसलिए भी नाराज है क्योंकि भारतीय हॉकी महासंघ ने अंतरराष्ट्रीय महासंघ के ‘भारतीय हॉकी प्रोमोशनल प्लान’को ठीक से क्रियान्वित नहीं किया है।
आईएचएफ को यह धमकी भी दी गई थी कि यदि वह ठीक से इस योजना को लागू नहीं करता है, तो आगामी वल्र्ड कप हॉकी के आयोजन का दायित्व भारत से वापस लिया जा सकता है। आईएचएफ के पदाधिकारियों को शायद आंतरिक राजनीति से ही फुर्सत नहीं मिलती है, तो वह हॉकी के विकास की कैसे सोच सकते हैं। अब खेल महर्षियों को चाहिए कि वे हॉकी को नई दिशा देने के लिए एकजुट होकर रास्ता ढूंढ़ें वर्ना हॉकी को रसातल में जाने से कोई रोक नहीं सकेगा।